दुमका। धर्मांतरित जनजाति को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए इस मुद्दे को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच ने बुधवार को डॉक्टर राजकिशोर हांसदा ने प्रेस वार्ता कर बताया कि इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर सबसे पहले स्वर्गीय कार्तिक उरांव जी ने 10 जुलाई 1967 को संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष इस तरह रखा था ‘कोई भी व्यक्ति जिसने जनजाति आदि मत तथा विश्वासों का परित्याग कर दिया हो और ईसाई या इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया हो वह अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं समझा जाएगा। देश के 750 से अधिक जनजातियों के विकास एवं उन्नति के लिए संविधान निर्माता ने आरक्षण एवं अन्य सुविधाओं का प्रावधान किया था लेकिन इन सुविधाओं का उन जनजातियों के स्थान पर वे लोग उठा रहे हैं जो अपनी रूढ़ि प्रथा को छोड़कर ईसाई या मुसलमान बन गए हैं। संविधान के मानसा के अनुरूप भारत के क्षेत्र में निवास कर रहे अनुसूचित जनजाति समुदाय का अर्थ है भौगोलिक दूरी, विशिष्ट संस्कृति, बोली भाषा परंपरा एवं रूढ़ि गत न्याय व्यवस्था सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन
संकोची स्वभाव।
अतः इन जनजातियों को अनुसूचित जाति के श्रेणी में रखकर उनके लिए न्याय और विकास को सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण एवं अन्य विशेष प्रावधान किए गए हैं।
जनजातियों को अधिकार के साथ अपनी संस्कृति आस्था परंपरा की सुरक्षा करते हुए विकास करने हेतु इन्हें सशक्त बनाने के लिए वित्तीय प्रावधान कस्टमरी लॉ वन अधिकार एवं अन्य प्रावधान किए गए हैं किंतु दुर्भाग्य की बात है कि कुछ धर्मांतरित लोग जो अपनी संस्कृति आस्था परंपरा को त्याग कर ईसाई या मुसलमान हो गए हैं इन सुविधाओं का 80% लाभ मूल जनजाति समुदाय से छीन रहे हैं।
हम चाहते हैं कि राजनीतिक दल अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीट पर धर्मांतरित व्यक्ति को टिकट न दे।ऐसे लोगों को जो समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं वह जनजाति वर्ग के साथ हो रहे इस अन्याय की लड़ाई में हमारे साथ खड़े हो और ग्राम पंचायत से लेकर सामाजिक पदों पर बैठे धर्मांतरित व्यक्तियों को बेनकाब करें।
जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सरकारी नौकरियों को हथियाना वाले ऐसे गलत एवं षड्यंत्रकारी धर्मांतरित व्यक्तियों के खिलाफ न्याय संगत कार्यवाही हेतु आगे आए।
केंद्र एवं राज्य सरकारों में ऊंचे पदों पर बैठे अफसर से भी यह अपेक्षा है कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े इस जनजातीय समुदाय की आवाज बने और धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुचित लाभ देने से खुद को रोक।
मीडिया के बढ़ते प्रभाव से हर कोई वाकिफ है इसलिए इस मुद्दे को जान आवाज बनाने के लिए मीडिया का सहयोग भी अपेक्षित है हम आशा करते हैं कि भारत में प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक एवं वेब मीडिया धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुचित लाभ देने की इस लड़ाई में हमारे साथ पूरा सहयोग करेगा भारत के प्रत्येक सांसद एवं विधानसभा सदस्य से अपेक्षा की जाती है कि वे जनजातियों को उनका वाजिब हक दिलाने में अपनी ओर से व्यक्तिगत रुचि लेकर पहल करें और धानमंतरित व्यक्तियों को बेनकाब करें धर्मांतरित जनजाति व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति सूची से हटाया जाए अर्थात जो धर्मांतरित जनजाति आरक्षण ले रहे हैं वह बंद हो अगर जनजाति धर्म संस्कृति समानता एवं रूडी प्रथा को जीवित रखना है तो उनके सर्व धर्म को जीवित रखना होगा सरकारी नौकरियां पहले से ही काम है यदि समय रहते धर्मांतरित लोगों को प्रदर्शित नहीं किया गया तो जनजाति समुदाय को नौकरियों का अवसर कभी नहीं मिल पाएगा इसलिए हमें जनजाति वर्ग के हित में इस लड़ाई में संयुक्त रूप से साथ आना होगा।
आज हम जितना है आने वाले दिन में और काम हो जाएंगे इसलिए जनजाति समाज को एकजुट रहकर अपना अधिकार मिलना चाहिए अन्यथा हम मिट जाएंगे इस प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से राष्ट्रीय सह संयोजक डॉक्टर राजकिशोर हांसदा, प्रांत सहसंयोजक माइकल मुर्मू,प्रांत संगठन मंत्री कैलाश उरांव, मीडिया प्रभारी संतोष कुमार मंडल उपस्थित थे।
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