राकेश कुमार चन्दन
हंसडीहा । भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। दुकानों पर रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां सज गई हैं और बहनें अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए पसंदीदा राखियों की खरीदारी में जुट गई हैं। समय के साथ समाज, जीवनशैली और त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आया है। कभी बहनें घर पर ही रंग-बिरंगे धागों से राखियां तैयार करती थीं, लेकिन अब बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ डिजाइनर राखियों की लंबी रेंज उपलब्ध है। बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां, जबकि रुद्राक्ष, मोती, चंदन, स्टोन और गणेश-लक्ष्मी की आकृति वाली राखियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। शादी के बाद दूसरे शहरों में रहने वाली बहनें मायके पहुंचने की तैयारी कर रही हैं। वहीं, जो बहनें किसी कारणवश घर नहीं पहुंच पाएंगी, वे डाक और ऑनलाइन माध्यम से भाइयों तक राखियां भेज रही हैं। कई भाई-बहन वीडियो कॉल के जरिए भी पर्व की खुशियां साझा करने की तैयारी में हैं। हालांकि माध्यम और तौर-तरीके बदल गए हैं, लेकिन राखी बांधने की परंपरा और उससे जुड़ी भावनाएं आज भी वैसी ही हैं। रक्षाबंधन के दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और हर सुख-दुख में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं। बाजार में राखियों की बढ़ती विविधता के बीच बहनों की पसंद भी खास है। कोई पारंपरिक राखी पसंद कर रही है तो कोई भाई की पसंद और व्यक्तित्व के अनुसार डिजाइनर राखी खरीद रही है। दुकानदारों को भी पर्व को लेकर अच्छी बिक्री की उम्मीद है। रक्षाबंधन सिर्फ कलाई पर बंधा एक धागा नहीं, बल्कि बचपन की यादों, प्रेम, विश्वास और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। समय के साथ राखी का रूप जरूर बदला, लेकिन भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा और उसके पीछे छिपी भावनाएं आज भी कायम हैं।
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राखी का रिश्ता खींच लाया दिल्ली से हंसडीहा
भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन अभी दो दिन दूर है, लेकिन भाई की कलाई पर राखी बांधने की चाह में निवेदिता दिल्ली से दो दिन पहले ही हंसडीहा पहुंच गईं। दूर शहर में रहने के बावजूद भाई-बहन के रिश्ते की डोर उन्हें अपने घर खींच लाई। निवेदिता का कहना है कि मोबाइल और वीडियो कॉल के दौर में दूरियां भले कम हो गई हैं, लेकिन भाई की कलाई पर अपने हाथों से राखी बांधने की खुशी अलग ही होती है। इसी भावनात्मक जुड़ाव के चलते उन्होंने रक्षाबंधन का इंतजार करने के बजाय पहले ही हंसडीहा पहुंचने का फैसला किया।
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रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया
वैदिक आचार्य रविरंजन पाठक के अनुसार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाया जाता है। राखी बांधने का पहला शुभ मुहूर्त सूर्योदय से सुबह 9:12 बजे तक, जबकि दूसरा सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। भद्रा नहीं होने से इस बार बहनों को राखी बांधने के लिए विशेष सावधानी रखने की जरूरत नहीं होगी। शुभ मुहूर्त में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना विशेष फलदायी माना गया है।


