भारत ने लद्दाख के प्रमुख दर्रों, चोटियों और जल स्रोतों को नक्शे में किया शामिल
नई दिल्ली । भारत सरकार ने लद्दाख में 28 रणनीतिक और भौगोलिक स्थानों के नाम आधिकारिक रूप से जारी किए हैं, जिसको लेकर चीन ने आपत्ति जताई है। 2 अक्टूबर को गृह मंत्रालय ने सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा जारी नक्शे में इन जगहों के नाम को स्थापित किया। चीन ने इस कदम को अवैध और अमान्य बताया है और उन क्षेत्रों पर अपना दावा दोहराया है। इन स्थानों में चोटियां, दर्रे, ग्लेशियर, घाटियां, जल स्रोत और गश्त से जुड़े रास्ते शामिल हैं, जो इस ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में अत्यधिक सामरिक महत्व रखते हैं।
यह कदम चीन की कार्टोग्राफिक कूटनीति के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। चीन ने पहले भी अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों का नाम बदलकर अपनी सूची जारी की थी और उस क्षेत्र को जांगनान या दक्षिण तिब्बत कहा था। रिपोर्टों के मुताबिक चीन ने 2017 और 2023 में भी ऐसा ही किया था। भारत ने भी लद्दाख में 28 जगहों के नाम मानकीकृत करके एक ऐसा ही प्रशासनिक कदम उठाया है, ताकि अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में इस्तेमाल होने वाले नामों को स्थापित किया जा सके।
इनमें से कुछ स्थान वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब हैं, जैसे गोगरा और हॉट स्प्रिंग। जून 2020 में गलवान घाटी संघर्ष में इन इलाकों में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच बड़े सैन्य प्रतिरोध और हिंसक झड़पें हुई थीं, जो इनकी रणनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। ये स्थान भारतीय सेना की गश्त और रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम हैं। अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और दुर्गम भूभाग के कारण, ये इलाके सुरक्षित क्षेत्र में गश्त और सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। इन 28 स्थानों में लद्दाख के विविध भूभाग शामिल हैं। जिन प्रमुख पहाड़ों और चोटियों के नाम तय किए गए हैं- उनमें अतिशा गिरी, कनिष्क पीक, करुण पीर पर्वत, मार्तंड गिरी, जोल्मोरी, जोरावर पीक, शिव री और माहेश्वरी प्रमुख हैं। सूची में चापचिंगल दर्रा और शचमीरिक दर्रा जैसे महत्वपूर्ण दर्रे, साथ ही पारपिक ग्लेशियर और स्कमरी ग्लेशियर भी शामिल हैं। ये भौगोलिक विशेषताएं इस ऊंचे इलाके में आवाजाही और पहुंच को निर्धारित करती हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत सरकार और लद्दाख प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से बातचीत करके इन नामों को अंतिम रूप दिया है। ज्यादातर नक्शों और सरकारी दस्तावेजों में इन नामों को शामिल करने से इन जगहों पर भारत के प्रशासनिक रिकॉर्ड को मजबूती मिलती है और यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय अधिकारी किन नामों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, नामों को तय करने का यह फैसला अपने आप में क्षेत्रीय विवादों को हल नहीं करता, लेकिन यह भारत द्वारा चुने गए नामों को उसके आधिकारिक नक्शों का अभिन्न अंग बना देता है। ये 28 स्थान अपनी भौगोलिक स्थिति, गश्त और सुरक्षा से जुड़े महत्व के कारण इस पूरे इलाके को किस तरह पेश किया जाए, इस व्यापक विवाद में अपनी अहमियत रखते हैं।


