राज्य और राजनीति
• केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम कराएंगे चुनाव
• आदित्य प्रसाद संभालेंगे पार्टी की कमान
चंदन मिश्र
खरमास के खत्म होते ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा। इसके साथ ही झारखंड भाजपा को नया अध्यक्ष भी मिल जायेगा। झारखंड भाजपा के सभी जिला अध्यक्षों का चुनाव संपन्न हो गया। इसके पहले मंडल अध्यक्षों के चुनाव करा लिए गये। अब प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की बारी है। केंद्रीय चुनाव पदाधिकारी ने झारखंड के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया है। जुएल ओराम अगले सप्ताह नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कराएंगे। भाजपा के अंदर कार्यकर्ताओं, नेताओं और इसके समर्थकों को अपने नए अध्यक्ष की प्रतीक्षा है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की जगह कौन लेगा, यह बात कोई रहस्यमय नहीं रही। केंद्रीय नेतृत्व ने दो महीने पहले पार्टी के राज्यसभा सदस्य और प्रदेश के महामंत्री आदित्य प्रसाद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर इस बात का संकेत दे दिया है कि झारखंड भाजपा की कमान उन्हें ही सौंपी जायेगी। अब आखिरी वक्त कोई फेरबदल होगा, इसकी संभावना दिखाई नहीं देती है। केंद्र में भी इसी तर्ज पर संसदीय बोर्ड ने नितिन नबीन को केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। जाहिर है कि खरमास के बाद नितिन नबीन ही अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। उनके निर्वाचन की औपचारिकता पूरी की जायेगी।
भाजपा के संविधान के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव तभी कराया जाता है, जब राज्य के आधे से अधिक जिलों के अध्यक्ष चुन लिए जाते हैं। झारखंड में पिछले चौबीस घंटे के अंदर सभी जिलों के अध्यक्ष निर्वाचित हो चुके हैं। प्रदेश नेतृत्व ने इसकी सूची बाकायदा जारी कर दी है। संवैधानिक प्रावधान के अनुसार अब प्रदेश अध्यक्ष के लिए नामांकन और निर्वाचन प्रक्रिया केंद्रीय चुनाव पदाधिकारी की देख-रेख में संपन्न हो सकेगी। जुएल ओराम प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए नामांकन औ चुनाव की तारीख घोषित करेंगे। एक उम्मीदवार रहने पर नामांकन के बाद निर्विरोध अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जायेगी। झारखंड में बाबूलाल मरांडी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद पिछले एक साल से इस बात की कयासबाजी चल रही है कि नया प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा। इस बीच केंद्रीय नेतृत्व ने सांसद आदित्य प्रसाद साहु को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दे दिया था कि झारखंड भाजपा की कमान यही संभालेंगे। फिर भी मीडिया के अलग-अलग मंचों पर अध्यक्ष के लिए अलग-अलग नामों की चर्चा की जा रही है।
झारखंड में सामाजिक समीकरण और भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग पर नजर डालें तो नेता प्रतिपक्ष के रूप में जिस दिन बाबूलाल मरांडी के नाम की घोषणा हुई थी, उसी दिन तय हो गया था कि पिछड़े वर्ग के किसी नेता को ही भाजपा प्रदेश की कमान सौंपी जायेगी। आदित्य प्रसाद साहु इसी फ्रेम में फिट बैठते हैं। वह समाज के पिछड़े वर्ग से आते हैं। संगठन में धीरे-धीरे जगह बनाते हुए नीचे से ऊपर तक पहुंचे हैं। भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। संगठन और चुनाव कार्यों में लगातार सक्रिय रूप से काम करते रहे हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो मध्यम उम्र के शख्स हैं। शारीरिक रूप से चुस्त और दुरुस्त हैं। खूब दौड़ भाग करते हैं। हर कार्यकर्ता तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। व्यवहार कुशल और विनम्र स्वभाव के हैं। अब देखना है कि चुनाव के बाद नए अध्यक्ष के रूप में आदित्य प्रसाद साहु किस तरह पार्टी को ऊर्जावान और सक्रिय बनाते हैं। कार्यकर्ताओं के अंदर कितना उत्साह भर पाते हैं। अपने सामने झामुमो-कांग्रेस के गठजोड़ वाली सरकार को किस तरह घेरते और चुनौती देते हैं।
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