दंतेवाड़ा में संरक्षित इंडियन मॉनिटर लिजर्ड के शिकार का मामला
इंस्टाग्राम रील में दिखी गाड़ी के नंबर से साइबर सेल ने आरोपियों को ट्रेस किया
दंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में संरक्षित वन्यजीव गोह (इंडियन मॉनिटर लिजर्ड) का शिकार कर उसे पकाकर खाने और इसकी रील सोशल मीडिया पर डालने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने ही आरोपियों की पहचान कराने में अहम भूमिका निभाई। वन विभाग ने साइबर सेल की मदद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मामला बचेली वन परिक्षेत्र के खुटेपाल गांव का है। वन विभाग के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले तीन लोगों ने मिलकर गोह का शिकार किया था। आरोप है कि शिकार के बाद उन्होंने गोह को वहीं पकाकर खाया और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर रील के रूप में अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग की नजर इस पर पड़ी और जांच शुरू की गई। दंतेवाड़ा के वन मंडलाधिकारी रंगनाथन के अनुसार, साइबर सेल ने इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई रील में दिखाई दे रहे वाहन के नंबर के आधार पर आरोपियों को ट्रेस किया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने शामगिरी पंचायत के आसपास के गांवों में पहुंचकर तीनों संदिग्धों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के घरों की तलाशी के दौरान दो धनुष और तीन बंडा समेत अन्य सामान बरामद किए गए। वन विभाग के अनुसार, तीर-धनुष और चाकू जैसे हथियारों का इस्तेमाल गोह के शिकार में किया गया था।
पूछताछ में शिकार और खाने की बात कबूली
अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि गोह का शिकार करने के बाद उसे मौके पर ही पकाकर खाया था। आरोपियों को दंतेवाड़ा की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
शेड्यूल-1 वन्यजीव है इंडियन मॉनिटर लिजर्ड
वन मंडलाधिकारी ने मीडिया को बताया कि इंडियन मॉनिटर लिजर्ड वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में संरक्षित वन्यजीव है। उन्होंने कहा कि इसे भी बाघ और हाथी की तरह उच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। शेड्यूल-1 वन्यजीव के शिकार के मामले में कानून के तहत तीन से सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार यह गंभीर वन्यजीव अपराध की श्रेणी में आता है और इसमें जमानत के प्रावधान भी सख्त हैं। इस मामले में सोशल मीडिया पर डाली गई रील आरोपियों के लिए ही सबूत बन गई। वन विभाग ने लोगों से संरक्षित वन्यजीवों से जुड़े किसी भी अवैध शिकार या उनके साथ क्रूरता का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बजाय तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देने की अपील की है।


