पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर 2.19 लाख करोड़ घाटे से सरकार चिंतित
नई दिल्ली । पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को जानकारी दी कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तीव्र बढ़ोतरी के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों को 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री पर कुल 2.19 लाख करोड़ की अंडर-रिकवरी हुई है। सरकार ने साफ किया है कि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तभी ईंधन की खुदरा कीमतों में कटौती पर विचार किया जाएगा।
पूरी की यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब आम जनता पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद कर रही है, लेकिन कंपनियों को हो रहे इस बड़े घाटे ने तत्काल राहत की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अकेले पेट्रोल पर 19,905 करोड़, डीजल पर 1.44 लाख करोड़ और एलपीजी पर 24,148 करोड़ की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, पिछली तिमाहियों की एलपीजी अंडर-रिकवरी 30,720 करोड़ रही। अंडर-रिकवरी का सीधा अर्थ है कि जब तेल कंपनियां किसी उत्पाद को उसकी लागत से कम कीमत पर बेचती हैं, तो जो अंतर आता है, उसे अंडर-रिकवरी कहते हैं। यह किसी कंपनी के समग्र वित्तीय प्रदर्शन में होने वाले शुद्ध नुकसान से अलग होती है, जिसमें सभी उत्पादों से होने वाला लाभ-हानि शामिल होता है।
मंत्री ने इस विरोधाभास को स्पष्ट किया कि जहां एक ओर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें अप्रैल में 120 डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में कमी क्यों नहीं आ रही है। उन्होंने बताया कि तेल कंपनियों को अभी भी एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर घाटा हो रहा है। साथ ही पेट्रोल पंपों पर वर्तमान में बिकने वाला ईंधन दो महीने पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल से तैयार हुआ है, जब कीमतें बहुत अधिक थीं। 72 डॉलर प्रति बैरल वाले कच्चे तेल का असर खुदरा कीमतों पर बाद में दिखाई देगा, बशर्ते यह स्तर लंबे समय तक बना रहे।
भारतीय तेल कंपनियों ने चार साल के अंतराल के बाद, 15 मई, 2026 को पेट्रोल की कीमत में 7.38 प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 7.52 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी ताकि बढ़ते घाटे की भरपाई की जा सके। पुरी ने भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद देश ने ईंधन की आपूर्ति सुचारु रूप से बनाए रखी। हालांकि, उन्होंने भविष्य में संभावित आपूर्ति बाधाओं से बेहतर ढंग से निपटने के लिए देश की तेल भंडारण क्षमता को बढ़ाने की जरुरत पर जोर दिया।
बता दें वर्तमान में भारत के पास करीब 76 से 80 दिनों का तेल भंडार है, जिसे और बढ़ाने की जरूरत है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक बाजार पर अत्यधिक निर्भर है, जहां करीब 90 फीसदी कच्चा तेल, 50 फीसदी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और 60 फीसदी एलपीजी आयात किया जाता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का सीधा असर देश के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ता है। रूस द्वारा भारत से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की खबरों पर पुरी ने कहा कि यह खरीद सीधे किसी भारतीय कंपनी से नहीं, बल्कि व्यापारियों (ट्रेडर्स) के माध्यम से की गई थी।


