रांची: झारखंड सरकार ने मंईयां सम्मान योजना की लाभार्थी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार अब योजना से जुड़ी महिलाओं को बैंकों के माध्यम से 20-20 हजार तक का स्वरोजगार ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। प्रयास सफल रहे तो आगामी बजट में इसे शामिल किया जा सकता है। शनिवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की। बैठक में शामिल बैंक प्रतिनिधियों ने योजना के क्रियान्वयन में सहयोग देने पर सहमति जताई और वरीय प्रबंधन से शीघ्र अनुमति लेने की बात कही। फिलहाल मंईयां सम्मान योजना के तहत राज्य की लाभार्थी महिलाओं को हर महीने 2,500 की सहायता राशि दी जा रही है। सरकार अब इसी सहायता को आधार बनाकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें उद्यमी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने बैंकों के सामने यह प्रस्ताव भी रखा कि महिलाओं द्वारा लिए जाने वाले ऋण की किस्तें उन्हें मिलने वाली सम्मान राशि से समायोजित की जा सकती हैं।
मंत्री ने कहा कि मासिक सहायता को सूक्ष्म व्यवसाय की पूंजी में बदलकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार योजना को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी आठ मार्च को लॉन्च करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इस पहल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति भी मिल चुकी है और योजना के नाम को लेकर भी मुख्यमंत्री के साथ विमर्श किया जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले झामुमो ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। चुनाव के बाद सरकार बनने पर इस वादे को पूरा करते हुए महिलाओं के खातों में 2,500 प्रतिमाह भेजना शुरू किया गया। अब उसी योजना को आगे बढ़ाते हुए लगभग 50 लाख लाभुक महिलाओं को 20 हजार तक का ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है।
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