पिछले दिनों हुए तीनों हादसों में भी यही रवैया देखने को मिला
नई दिल्ली । पिछले दिनों अलग-अलग इलाकों में तीन बड़े हादसे हुए। किसी घटना के होने के बाद शोर-शराबे, सियासी बयानबाजी और हल्ला गुल्ला के बीच असली गुनहगार की तलाश अपने रास्ते से भटक जाती है और आख़िरकार, एक बलि का बकरा सामने आता है और कहानी का रुख बदल दिया जाता है। पिछले दिनों हुए इन तीनों हादसों में भी यही रवैया देखने को मिला है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर सिस्टम कब सुधरेगा और अगर सिस्टम में सुधार नहीं होता है, तो इस तरह की घटनाओं की जिम्मेदारी बलि के बकरे के हवाले करने के बजाय सिस्टम के लोग कब लेंगे। असली जिम्मेदारों पर कब जवाबदेही तय की जाएगी?
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 13.3 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बाईपास है, इस हाइवे पर खंडाला घाट सेक्शन में एक गैस टैंकर पलट गया, जिसके बाद 32 घंटे का जाम लग गया। कई यात्रियों को अपनी गाड़ियों में ही सोना पड़ा और लोगों को रात भर गाड़ी रोड पर ही पार्क करके इंतज़ार करना पड़ा। इस दौरान लोगों को खाना, पानी और वॉशरुम से जुड़ी परेशानियां झेलती पड़ीं। इसमें एम्बुलेंस, ट्रक और प्राइवेट कारों समेत हजारों गाड़ियां फंसी रहीं। यह सिस्टम का फेल्योर था। जब कई घंटों बाद प्रशासन जगा, तो उस टैंकर ड्राइवर पर कार्रवाई हुई, जो खंडाला घाट में पलट गया था। ड्राइवर पर आरोप लगाया गया कि टैंकर स्पीड में था, इसलिए पलट गया।
दिल्ली के जनकपुरी में कैलाशपुरी के रहने वाले कमल ध्यानी (25) रात में जल बोर्ड के काम के लिए खोदे गए 15 फुट गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई। जांच से पता चलता है कि खुले गड्ढे में गिरने से उनकी मौत हुई। करीब आठ घंटे तक, कमल ध्यानी बिना घेरे वाले गहरे गड्ढे में पड़े रहे, उन्हें कोई मदद नहीं मिली और आखिर उनकी मौत हो गई। कुछ लोगों ने बाइकर को खुले गड्ढे में गिरते देखा, ठेकेदार को बताया और वह मौके पर पहुंचा, फिर भी उसने कुछ नहीं किया। अगले दिन सुबह उसके परिवार वालों ने उसे ढूंढा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मामले में जांच हुई। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) ने बताया कि गिरफ्तार मज़दूर की पहचान 23 साल के योगेश के रूप में हुई है, जो यूपी के फ़िरोज़ाबाद का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि वो हादसे के वक़्त मौके पर मौजूद था। वह उन शुरुआती लोगों में शामिल था, जिन्हें पता चला था कि बाइकर गड्ढे में गिरी है। योगेश के अलावा भी गिरफ्तारी हुई हैं। हादसे पीछे के असली ज़िम्मेदारों को कटघरे में खड़ा करने के बजाय, मज्दूर को आरोपी बना दिया गया1 क्या इस मामले में सिस्टम की कोई ख़ामी नहीं नजर आती है? आखिर, सिस्टम में बैठे लोग इस तरह के हादसों की जिम्मेदारी कब लेंगे?
हरियाणा के फरीदाबाद में सूरजकुंड मेला में 7 फरवरी झूला चलती अचानक टूट गया, जिसमें एक की मौत और कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस के मुताबिक झूला लगाने वाली कंपनी हिमाचल केयर फन केयर के मालिक शाकिर को गिरफ़्तार किया गया। वह हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गांव टोका नंगला का रहने वाला है। पुलिस ने एक अन्य आरोपी नितेश, निवासी धर्मपुरी सदर मेरठ कैंट, उत्तर प्रदेश को भी गिरफ़्तार किया है। क्या इस हादसे में मेले के जिम्मेदारों को भी कटघरे में नहीं खड़ा किया जाना चाहिए था? क्या मेले में झूला लगाने की परमिशन ग्रांट करने वालों की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वे झूले के फिजिकल स्टेटस की जांच करें, उसके बाद लगाने की इजाजत दें। इस मामले में सिस्टम ने लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया।
इन तमाम हादसों ने सिस्टम की गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता को सामने रखा है। सवाल यह है कि आख़िर कब जिम्मेदारी तय होगी और कब असली दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। क्या हर बार किसी मजदूर या ड्राइवर को ही बलि का बकरा बनाकर सिस्टम अपनी नाकामी से बचता रहेगा, या कभी सुधार की ठोस पहल भी होगी?


