सीसीटीवी व्यवस्था में खामियों पर नाराजगी, ‘केरल मॉडल’ अपनाने की दी सलाह
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के मामलों और पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव को मंगलवार 7 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सनदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान सीसीटीवी कैमरों की खराब स्थिति और निगरानी प्रणाली में कमी पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देशभर में थानों में कैमरों की स्थिति संतोषजनक नहीं है और कई जगह कैमरे या तो लगे ही नहीं हैं या काम नहीं कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों को केरल के मॉडल से सीख लेनी चाहिए, जहां पुलिस थानों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है। कोर्ट ने पूछा कि जब एक राज्य इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कर सकता है, तो बाकी राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।
यह मामला अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) के तहत उठाया गया है, जिसमें देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और उनकी कार्यशीलता की समीक्षा की जा रही है। कोर्ट ने हाल ही में चीनी निर्मित सीसीटीवी कैमरों को हटाने की खबरों पर भी केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 में ही सभी पुलिस थानों में नाइट विजन युक्त सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने का निर्देश दिया था। इसका उद्देश्य हिरासत में होने वाली यातना और मौतों को रोकना तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना था।


