वैश्विक संकेतों का असर, गिरावट के बाद घरेलू बाजार में दिखी तेज खरीदारी
नई दिल्ली । चांदी की कीमतों में शुक्रवार को एक बार फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी गिरावट के बाद कॉमेक्स पर सिल्वर का भाव गिरकर 63.900 डॉलर प्रति औंस तक आ गया। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला, जहां एमसीएक्स सिल्वर का रेट इंट्रा-डे में फिसलकर 2.29 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, निचले स्तरों पर निवेशकों की तरफ से जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसी का नतीजा रहा कि चांदी की कीमतों में रिकवरी आई और भाव दोबारा बढ़कर 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद आगे और दबाव बन सकता है। बाजार के जानकारों के अनुसार चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब कम होता नजर आ रहा है।
दोनों देश न्यूक्लियर बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले गोल्ड और सिल्वर की मांग घटी है। दूसरा कारण डॉलर का अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत होना है। इसके अलावा, ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई प्रॉफिट बुकिंग ने भी कीमतों पर दबाव डाला। एक बाजार विशेषज्ञ का कहना है कि चांदी की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से 75 से 80 प्रतिशत तक गिर सकती हैं। उनका अनुमान है कि आने वाले दो सालों में सिल्वर का भाव घटकर 25 से 30 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो चांदी में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और किसी भी फैसले से पहले बाजार के संकेतों पर करीबी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।


