कोलकाता । पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव करीब आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई प्रमुख उम्मीदवारों से जुड़े मामलों की जांच तेज कर दी है। राज्य में दो चरणों में मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है, और इन कार्रवाइयों ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।
सुजीत बोस, जो बिधाननगर से टीएमसी उम्मीदवार और राज्य के अग्निशमन मंत्री हैं, को नगर निकायों में कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में 6 अप्रैल को ईडी ने तलब किया। आरोप है कि 2014 से 2018 के बीच विभिन्न नगरपालिकाओं में रिश्वत लेकर नियुक्तियां की गईं। यह जांच कोलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। वहीं मध्यमग्राम से उम्मीदवार और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष भी ईडी के दायरे में हैं। उन्हें 9 अप्रैल को तलब किया गया और उनके आवास सहित कई ठिकानों पर पहले ही छापेमारी हो चुकी है। आरोप है कि नगर निकायों में हजारों नियुक्तियां अवैध रूप से की गईं, जिसमें बिचौलियों की भूमिका सामने आई। दक्षिण कोलकाता के राशबेहारी से उम्मीदवार देबासिस कुमार पर जमीन हड़पने के आरोप हैं। ईडी ने पिछले 15 दिनों में उन्हें तीन बार पूछताछ के लिए बुलाया। मामला एक निजी निर्माण समूह और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके अलावा भगवानपुर सीट से उम्मीदवार मानब कुमार परुआ को 2022 के भूपतिनगर विस्फोट मामले में एनआईए ने पूछताछ के लिए तलब किया। इस विस्फोट में तीन लोगों की मौत हुई थी, और जांच बाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर एनआईए को सौंपी गई।
इन कार्रवाइयों से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि टीएमसी चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव का प्रयास करार दे रही है। इसतरह चुनाव के नजदीक इन मामलों का राजनीतिक असर और बढ़ने की संभावना है, जिससे पश्चिम बंगाल का चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प और विवादपूर्ण हो गया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए न सिर्फ चुनावी रणनीति, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।


