कोडरमा । डिजिटल युग में व्यापारिक लेन-देन, बिलिंग और स्टॉक का हिसाब-किताब भले ही कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और मोबाइल ऐप के माध्यम से रखा जा रहा हो, लेकिन धनतेरस और दीपावली पर पारंपरिक बही-खातों का महत्व आज भी बरकरार है। दीपावली पर विशेष पूजन के साथ नए कारोबारी साल की शुरुआत को लेकर झुमरी तिलैया के बाजारों में बही-खातों की खरीदारी जोर पकड़ रही है। शहर के कई व्यवसायियों ने धनतेरस पर ही बही-खातों का पूजन किया, जबकि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त से लाल कपड़े में बंधे पारंपरिक रजिस्टरों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। पूर्णिमा टॉकिज के समीप स्थित दुकानों में सुबह से ही व्यापारी बही-खाते खरीदने पहुंच रहे हैं। स्थानीय दुकानदार कैलाश गुप्ता और आलोक गुप्ता ने बताया कि बाजार में 50 से 1500 रुपये तक के बही-खाते उपलब्ध हैं।

इसके अलावा स्टॉक रजिस्टर, लेजर, कैश बुक और डे बुक की कीमत 50 से 500 रुपये तक है। दुकानदार विनोद भदानी ने बताया कि डिजिटल दौर के बावजूद व्यापारी परंपरा के अनुसार नए बही-खाते खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। खास बात यह है कि बही-खाते में पहली एंट्री करने के लिए आज भी स्याही वाले पेन और दवात की खरीदारी की जा रही है। बाजार में निब वाले पेन 30 से 100 रुपये तथा स्याही की दवात करीब 30 रुपये में उपलब्ध है। व्यापारियों का कहना है कि सर्राफा, गल्ला, कपड़ा और किराना कारोबार में उधारी, एडवांस और गिरवी जैसे संवेदनशील लेन-देन का हिसाब रखने के लिए कागजी बही-खाते आज भी उपयोगी हैं। कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर में तकनीकी खराबी या डेटा डिलीट होने की आशंका के बीच पारंपरिक बही-खाते कारोबारियों के लिए भरोसेमंद रिकॉर्ड बने हुए हैं। इस तरह झुमरी तिलैया के बाजार में आधुनिक तकनीक के साथ पुरानी कारोबारी परंपरा का संगम देखने को मिल रहा है।



