एसकेएमयू के 10वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार का युवाओं को संदेश, समयबद्ध परीक्षा, पारदर्शी परिणाम और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर
– उपाधि को मंजिल नहीं, नई शुरुआत मानें युवा; सफलता के साथ ईमानदारी, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी।
– संताल हूल की गौरवशाली विरासत से प्रेरणा लेकर जनजातीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं का संरक्षण करें विद्यार्थी।
– विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका; नौकरी तलाशने के साथ रोजगार सृजन की क्षमता भी विकसित करें।
ब्यूरो रिपोर्ट

दुमका। डिग्री हासिल करना ही शिक्षा की अंतिम उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करना ही शिक्षा की वास्तविक सार्थकता है। प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन में कम-से-कम एक ऐसे व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प ले, जो सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई से वंचित है। किसी बच्चे को विद्यालय तक पहुंचाना, जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में मदद करना या किसी निरक्षर व्यक्ति को अक्षर ज्ञान देना भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह संदेश राज्यपाल-सह-झारखंड के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने गुरुवार को दुमका के कन्वेंशन सेंटर में सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के दसवीं दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए दिया।
राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि वर्षों के परिश्रम, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के त्याग का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी डिग्री को जीवन की मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत समझें। शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल व्यक्ति बनना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी है। ईमानदारी, अनुशासन, विनम्रता और संवेदनशीलता के बिना सफलता अधूरी है।
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छात्रहित को केंद्र में रखकर चले विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर अपनी अपेक्षाएं रखते हुए कुलाधिपति ने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय की प्रत्येक नीति और निर्णय के केंद्र में छात्रहित होना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित कक्षाएं, शिक्षकों का प्रभावी मार्गदर्शन तथा पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने शैक्षणिक सत्रों के नियमित संचालन, समय पर परीक्षा और निर्धारित समय-सीमा में परिणाम प्रकाशित करने पर विशेष जोर दिया। कहा कि सत्र और परीक्षा में अनावश्यक विलंब से विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार की योजनाएं प्रभावित होती हैं। इसलिए विश्वविद्यालय स्पष्ट अकादमिक कैलेंडर तैयार कर उसका सख्ती से पालन करे। परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया पारदर्शी, व्यवस्थित एवं समयबद्ध होनी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन में जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।
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संताल हूल की विरासत से लें प्रेरणा
राज्यपाल ने कहा कि सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय का नाम संताल हूल के महान नायकों सिदो और कान्हु के नाम पर रखा गया है। वर्ष 1855-56 का संताल हूल अन्याय और शोषण के खिलाफ साहस, स्वाभिमान और एकजुटता का ऐतिहासिक प्रतीक है। सिदो-कान्हु, चांद-भैरव और फूलो-झानो सहित अनेक वीर-वीरांगनाओं का संघर्ष आज भी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, अस्मिता और सम्मान की रक्षा की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि संताल परगना की जनजातीय संस्कृति, भाषाएं, परंपराएं और लोकज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर हैं। आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए इस विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है। विश्वविद्यालय में कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे स्थानीय जरूरतों से जुड़े विषयों पर शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि शोध का लाभ सीधे समाज तक पहुंच सके।
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नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले भी बनें युवा
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प को पूरा करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश देते हुए स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक कारीगरों, हुनरमंद लोगों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि झारखंड के युवाओं में प्रतिभा और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। वे अपने ज्ञान, कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता से नए अवसर पैदा करें। युवा नौकरी पाने का प्रयास अवश्य करें, लेकिन रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता भी विकसित करें। राज्य के स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं को विकास से जोड़ना समय की मांग है।
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उपलब्धियों का लाभ समाज तक पहुंचाएं
अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर सीखते रहने और अपने कार्यों में ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत उपलब्धियों को केवल अपनी प्रगति तक सीमित न रखें, बल्कि उसका लाभ समाज के विकास में भी लगाएं। अपनी जड़ों, संस्कृति और समाज से जुड़े रहकर ही वास्तविक प्रगति संभव है। इस अवसर पर उन्होंने सभी को आगामी दीपावली और छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।



