बेंगलुरु । कर्नाटक में विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका लेकर आए हैं। पार्टी को जनता दल सेक्युलर के हाथों एक महत्वपूर्ण सीट गंवानी पड़ी है। खास बात यह है कि यह हार बैलेट पेपर के जरिए हुए चुनाव में हुई है, जिस पर विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर तंज कसना शुरू कर दिया है, जो लगातार ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से चुनाव की वकालत करती रही है। राज्य के कुल चार निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था और मतगणना अभी जारी है। अब तक दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और जेडीएस गठबंधन ने जीत दर्ज कर ली है।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में हुए चुनाव में जेडीएस नेता एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुटन्ना को हराया है। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी पुटन्ना को महज 9,902 वोट ही मिल सके। इस क्षेत्र में कुल 27,405 मतदाताओं में से 22,468 ने वोट डाले थे, जिसमें 81.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतगणना में 21,056 मत वैध पाए गए, जबकि 1,857 मत अवैध घोषित किए गए। कांग्रेस की इस हार के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, इस बार (कांग्रेस नेता) ईवीएम पर आरोप नहीं लगा पाएंगे। राज्य की मशीनरी आपके हाथों में है और चुनाव पेपर बैलेट्स से हुए थे। इसके बावजूद एनडीए के श्री एपी रंगनाथ बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एमएलसी चुनाव जीत गए। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि अब जब पढ़े-लिखे शिक्षकों ने उनकी सरकार की नाक के नीचे पेपर पर वोट किया है, तो वे क्या बहाना देंगे। निखिल कुमारस्वामी ने एपी रंगनाथ और भाजपा-जेडीएस के नेताओं व कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं भी दीं।
अन्य सीटों पर भी भारतीय जनता पार्टी मजबूत स्थिति में दिख रही है। भाजपा के शशिल जी नमोशी ने उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर भाजपा उम्मीदवार केएम सुरेश कांग्रेस के शशि हुलिकुंते मठ से आगे चल रहे हैं। वहीं, पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा एमएलसी एसवी संकनूर कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई पर 3,556 मतों की बढ़त बनाए हुए हैं। दूसरे दौर की मतगणना के बाद संकनूर को 12,613 और लिंबिकाई को 9,057 वोट मिले थे। यह हार कांग्रेस के लिए दोहरे झटके जैसी है। एक ओर राज्य में उसकी अपनी सरकार है, जहां हाल ही में मुख्यमंत्री में बदलाव हुआ और डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली है। वहीं, दूसरी ओर, पार्टी लगातार ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है, लेकिन उसी बैलेट पेपर पर उसे हार का सामना करना पड़ा है।
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