नई दिल्ली । देश में एसिड अटैक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तेजाब की खुदरा बिक्री पर लागू दिशा-निर्देशों को सख्ती से अमल में लाने को कहा है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि जिन राज्यों में इन दिशा-निर्देशों को लागू करने में ढिलाई बरती जा रही है, क्या केंद्र ने उनसे जवाब मांगा है? अदालत ने कहा कि यदि मौजूदा व्यवस्था में कमियां हैं तो सरकार को दिशा-निर्देशों में संशोधन कर उन्हें प्रभावी बनाने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अर्चना पाठक दवे से एसिड की बिक्री पर नियंत्रण को लेकर सवाल किए। इस पर उन्होंने बताया कि सरकार ने तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर राज्यों को भेजे थे, लेकिन उनके क्रियान्वयन में ढिलाई बरती जा रही है। इस जवाब पर पीठ ने पूछा कि क्या केंद्र ने उन राज्यों से स्पष्टीकरण मांगा है, जहां नियमों का पालन नहीं हो रहा है। अदालत ने कहा कि संघीय ढांचे के कारण राज्यों से जवाब मांगने में कठिनाई हो सकती है, लेकिन मौजूदा स्थिति से स्पष्ट होता है कि या तो दिशा-निर्देशों में खामियां हैं या उन्हें लागू करने में लापरवाही बरती जा रही है। दोनों ही स्थितियों में सुधार की आवश्यकता है।
बंगाल में सबसे ज्यादा मामले
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में एसिड अटैक के 207 मामले दर्ज किए गए। इनमें पश्चिम बंगाल 57 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश में 31 और गुजरात में 15 मामले सामने आए। हालांकि, एसिड सर्वाइवर्स ट्रस्ट इंटरनेशनल (एएसटीआई) का अनुमान है कि भारत में हर साल औसतन करीब 1,000 एसिड अटैक होते हैं। संगठन के अनुसार, सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और अन्य कारणों से कई पीड़िताएं या उनके परिवार ऐसी घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं करते। इस वजह से वास्तविक घटनाओं की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।


