सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति की अनूठी पहल, ‘फुटपाथ ही जीवन’ थीम के जरिए समाज को देगी मानवता, शिक्षा और स्वच्छता का संदेश
रामा कान्त मालवीय
देवघर । शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर शिवलोक परिसर, धोबी टोला स्थित सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति इस वर्ष भी पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और भव्यता के साथ मां दुर्गा की आराधना की तैयारी में जुटी है। वर्ष 2005 से निरंतर विशुद्ध वैष्णव पद्धति से पूजा-अर्चना कर रही समिति ने इस बार धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों को भी विशेष महत्व दिया है। समिति की ओर से इस वर्ष ‘फुटपाथ ही जीवन’ की अनूठी थीम पर आधारित पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से समाज के उपेक्षित वर्गों के जीवन-संघर्ष, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
पूजा का संपूर्ण अनुष्ठान मुख्य पुरोहित कुणाल महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार और वैष्णव परंपरा के अनुसार संपन्न कराया जाएगा। समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को मां भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ समाज में मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सेवा भावना को मजबूत करना भी है।
नारी शक्ति के हाथों में पूजा की कमान
मां भगवती को शक्ति स्वरूपा मानते हुए समिति ने इस वर्ष पूजा व्यवस्था में नारी शक्ति की भागीदारी को विशेष महत्व दिया है। महिला समिति की सदस्य पूजा की तैयारियों, साज-सज्जा, व्यवस्था और अनुशासन की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभा रही हैं। महिला अध्यक्ष श्रीमती सुनीता जायसवाल के नेतृत्व में महिलाएं आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। समिति की यह पहल महिला सशक्तिकरण और समाज में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने का संदेश देती है।
‘फुटपाथ ही जीवन’ थीम से समाज को मिलेगा संदेश
इस वर्ष पंडाल का मुख्य आकर्षण ‘फुटपाथ ही जीवन’ विषय पर आधारित सामाजिक प्रस्तुति होगी। इसके माध्यम से शहर की चकाचौंध के बीच फुटपाथ पर जीवन गुजारने वाले गरीबों, जरूरतमंदों, बुजुर्गों और अन्य वंचित लोगों की समस्याओं को जीवंत प्रतिमाओं और संदेशपरक नारों के जरिए सामने लाने का प्रयास किया गया है। पंडाल में सड़क दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की मदद करने के बजाय वीडियो बनाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए लोगों से पहले घायल की जान बचाने और मानवता का परिचय देने की अपील की जाएगी। इसी तरह बाल मजदूरी के विरुद्ध संदेश देते हुए बच्चों के हाथों में बर्तन की जगह कलम थमाने और उन्हें विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया जाएगा। भोजन की बर्बादी रोकने के लिए लोगों से अपनी थाली में उतना ही भोजन लेने का आग्रह किया जाएगा, जितनी जरूरत हो। साथ ही, जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने और भूख से जूझ रहे लोगों की सहायता करने का संदेश भी दिया जाएगा। दिव्यांग व्यक्तियों के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को सम्मान देने के साथ उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ने की प्रेरणा दी जाएगी। वहीं, नेत्रदान के महत्व को भी रेखांकित किया जाएगा। स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सफाई कर्मचारियों के सम्मान का संदेश देते हुए बताया जाएगा कि गंदगी फैलाना गलत है, न कि सफाई का काम करना। पंडाल में मेहनत कर अपना जीवनयापन करने वाले बुजुर्गों के सम्मान, उनसे सामान खरीदते समय अनावश्यक मोलभाव नहीं करने तथा ठंड के मौसम में बेघर लोगों को गर्म कपड़े और आश्रय उपलब्ध कराने की अपील भी की जाएगी। इस प्रकार पंडाल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संवेदनाओं का संदेशवाहक बनने का प्रयास करेगा।
सप्तमी से दशमी तक महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था
समिति की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है। सप्तमी तिथि को शुद्ध देसी घी का हलवा और पारंपरिक तहरी वितरित की जाएगी। अष्टमी को हलवा, तहरी के साथ विशेष खीर का भोग लगाया जाएगा। नवमी तिथि को भी हलवा, तहरी और खीर का महाप्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा। वहीं, विजयादशमी पर मां दुर्गा के विसर्जन के उपरांत भक्तों के बीच पारंपरिक मिठाई और बेसन अथवा बूंदी के लड्डू बांटे जाएंगे।
आयोजन को सफल बनाने में जुटे समिति के सदस्य
पूजा को भव्य, सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाने के लिए समिति के सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं। पंडाल निर्माण, विद्युत सज्जा, सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रसाद वितरण की व्यवस्था में नवीन जायसवाल, सिद्धार्थ गौतम, नंदलाल केसरी, लखन केसरी, जयप्रकाश पांडेय, राजेश जायसवाल, गणेश रजक, अमर रजक, अभिषेक मिश्रा, मोनू केसरी, विजय पांडेय, पंकज रजक, अंकित केसरी, प्रकाश जी और सोनू रजक सहित समिति के अनेक युवा एवं वरिष्ठ सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समिति के संरक्षक डॉ. डी. तिवारी, महिला अध्यक्ष सुनीता जायसवाल, मुख्य पुरोहित कुणाल महाराज, कोषाध्यक्ष विजय पांडेय तथा अन्य सदस्यों ने नगरवासियों और श्रद्धालुओं से सपरिवार पहुंचकर मां वैष्णवी के दर्शन करने, महाप्रसाद ग्रहण करने और पंडाल में प्रदर्शित सामाजिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की है।
समिति का संदेश स्पष्ट है कि मां दुर्गा की सच्ची आराधना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, महिलाओं के सम्मान, बच्चों की शिक्षा, स्वच्छता और मानवता की सेवा में भी निहित है।


