एयरस्पेस बंद होने और अमेरिका वीजा नीतियों ने बदला इंटरनेशनल ट्रैवल का ट्रेंड
नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता, एयरस्पेस बंद होने और अमेरिका की कड़ी वीजा नीतियों ने भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को एक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब तक खाड़ी देशों, अमेरिका और यूरोप के भरोसे चलने वाले भारत के दो सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय गेटवे, दिल्ली और मुंबई, अब तेजी से पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों को अपना नया ग्रोथ इंजन बना रहे हैं।
आईजीआई एयरपोर्ट की संचालन एजेंसी डायल के चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-अगस्त के आधिकारिक आंकड़े इस बड़े बदलाव की पुष्टि करते हैं। जहां दिल्ली से कुल अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक 0.8 फीसदी बढ़कर 86.2 लाख रहा, वहीं एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के यात्रियों में 11.4 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जो 32.1 लाख से बढ़कर 35.7 लाख पहुंच गया। इसके ठीक उलट, उत्तर अमेरिका का ट्रैफिक 26.2 फीसदी गिरकर 7.5 लाख से घटकर सीधे 5.5 लाख पहुंचा। इसके अलावा, खाड़ी देशों के यात्रियों में 4.1 फीसदी की गिरावट आई और अफ्रीका के ट्रैफिक में 10.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जबकि यूरोप का ट्रैफिक 19.6 लाख से मामूली बढ़कर 19.7 लाख के साथ लगभग स्थिर बना हुआ है।
इस बदलाव के पीछे सटीक कारण और बदलते प्रोटोकाल हैं। पहला पाकिस्तानी एयरस्पेस की लगातार बंदी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एयरलाइंस को लंबे और वैकल्पिक रूट लेने पड़ रहे हैं, जिससे विमान ईंधन की खपत और आपरेटिंग कास्ट बढ़ी है और अमेरिका व खाड़ी देशों का सफर महंगा हुआ है। वहीं, दूसरा ओर अमेरिका और कनाडा में भारतीय छात्रों व विजिटर्स के लिए कड़े नियम, वीजा मिलने में देरी और एयर इंडिया द्वारा अहमदाबाद हादसे के बाद अपनी लांग-हाल उड़ानों में कटौती करने से उत्तर अमेरिका का ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
तीसरा- लुफ्तहंसा, स्विस और ब्रिटिश एयरवेज जैसी प्रमुख यूरोपीय एयरलाइंस ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ानें घटाकर भारत के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाई है, जिससे यूरोप रूट पर ट्रैफिक बना हुआ है। इसके साथ ही, सुरक्षा और इमिग्रेशन को लेकर एक बड़ा नया प्रोटोकाल भी लागू हुआ है। अनुमान है कि नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस बदलाव को और मजबूती देगा, जहां से एयरलाइंस सुदूर पूर्व और आस्ट्रेलिया के लिए रूट्स तैयार कर रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनौतियों के बावजूद डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि इस वित्तिय वर्ष में दिल्ली एयरपोर्ट का कुल पैसेंजर फुटफाल 8.2 करोड़ रहने की उम्मीद है, जो विगत वित्तिय वर्ष के 7.9 करोड़ से करीब 4 फीसदी ज्यादा है। 25 अक्टूबर से मार्च अंत में दिल्ली से फिलीपींस एयरलाइंस (मनीला), ईवीए एयर (ताइपे), हन्नी एयर (मंगोलिया) और उराल एयरलाइंस (रूस) की नई सेवाएं शुरू हो रही हैं। इसके अलावा, एयरबस ए350, बोइंग 787 और ए321एक्सएलआर जैसे नए जमाने के विमानों के बेड़े में शामिल होने से एअर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइंस अगले 12 से 18 महीनों में जापान, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए सीधी उड़ानों का विस्तार करने जा रही हैं।


