नई दिल्ली । दिल की बीमारी का मतलब केवल हार्ट अटैक नहीं है, बल्कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेलियर और हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्याएं भी इसमें शामिल हैं। इसलिए शरीर में होने वाले नए या असामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। सीने में दबाव, भारीपन, जकड़न, जलन या असहजता दिल से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक में हमेशा तेज दर्द हो, यह जरूरी नहीं है। सीने की तकलीफ कुछ मिनट तक रह सकती है और ठीक होने के बाद दोबारा भी शुरू हो सकती है। इसी तरह सामान्य काम करने, थोड़ी दूरी चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पहले की तुलना में ज्यादा सांस फूलना भी ध्यान देने योग्य संकेत है। हार्ट फेलियर की स्थिति में सांस फूलने की समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है और कुछ लोगों को रात में सांस लेने में परेशानी के कारण नींद से उठना पड़ सकता है। बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार असामान्य थकान और कमजोरी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासकर महिलाओं में असामान्य थकान कुछ हृदय संबंधी समस्याओं के साथ दिखाई दे सकती है। दिल से जुड़ी परेशानी का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। यह एक या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है।
महिलाओं में पीठ, कंधे या जबड़े का दर्द कभी-कभी कम सामान्य रूप में दिखाई देने वाला हृदय संबंधी लक्षण हो सकता है। पैरों और टखनों में लगातार सूजन भी ध्यान देने योग्य है। हार्ट फेलियर में हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होने पर शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है। इसके अलावा अचानक चक्कर आना, सिर हल्का लगना, कमजोरी या बिना वजह पसीना आना भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं, खासकर जब इनके साथ सीने में परेशानी या सांस फूलने जैसी समस्या मौजूद हो। इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में दिल की बीमारी की पुष्टि नहीं करता। लेकिन यदि लक्षण नए हैं, बार-बार हो रहे हैं, बढ़ रहे हैं या कई संकेत एक साथ दिखाई दे रहे हैं तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ईसीजी, रक्त जांच, इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट, सीटी या कोरोनरी एंजियोग्राम जैसी जांच करा सकते हैं।
धूम्रपान से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल व मधुमेह पर नियंत्रण दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। एक्सपर्ट की माने तो दिल शरीर का ऐसा अंग है जो बिना रुके लगातार काम करता है और पूरे शरीर में रक्त व ऑक्सीजन पहुंचाता है। दिल या उसे रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में परेशानी होने पर शरीर कई बार अचानक नहीं, बल्कि छोटे-छोटे संकेतों के जरिए चेतावनी देता है। समस्या यह है कि इन लक्षणों को अक्सर गैस, एसिडिटी, थकान, तनाव या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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