कोलकाता । महालया (सर्व पितृ अमावस्या) के अवसर पर पितरों के तर्पण के लिए शनिवार को सुबह से ही राजधानी कोलकाता और हावड़ा के विभिन्न गंगा घाटों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हुगली नदी के तटों और विभिन्न तालाबों के किनारे लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से तर्पण किया। हावड़ा और कोलकत्ता के करीब चार दर्जन घाटों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
हिन्दू मान्यता के अनुसार, महालया के साथ ही श्राद्ध पक्ष का समापन होता है और देवी पक्ष की शुरुआत यानी मां दुर्गा के आगमन का उल्लसित माहौल बन जाता है। इस पावन अवसर पर दूर-दूर से लोग सुबह ही गंगा स्नान और तर्पण के लिए पहुंचे, और यह सिलसिला पूरे दिन चलेगा। महालया के दिन से ही बंगाल में दस दिवसीय दुर्गा पूजा का भव्य उत्सव भी आरंभ हो जाता है, जिससे राज्य भर में उत्सव का माहौल देखने को मिलता है। इस दिन राज्य के सरकारी कार्यालयों में भी अवकाश रहता है।
विशेष रूप से, यूनेस्को द्वारा कोलकाता की दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किए जाने के बाद से राज्य में और भी बड़े पैमाने पर उत्सव का आयोजन हो रहा है। इस वर्ष पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि दुर्गा पूजा को हिंदू मान्यता के अनुसार पवित्र तरीक़े से मनानी होगी।
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