नई दिल्ली । लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखने और गलत पोश्चर में रहने की आदत के कारण गर्दन, पीठ, कमर और रीढ़ में दर्द होना आजकल आम समस्या हो गई है। इस दर्द से छुटकारा पाने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अर्धचक्रासन भी ऐसा ही एक योगासन है, जिसमें शरीर को पीछे की ओर हल्का मोड़ा जाता है।
हालांकि यह आसन देखने में आसान लगता है, लेकिन इसे करते समय शरीर का संतुलन और सही तकनीक का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित और सही तरीके से अर्धचक्रासन का अभ्यास करने से रीढ़ की लचक बेहतर बनाए रखने के साथ पीठ और उससे जुड़ी मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि अर्धचक्रासन का अभ्यास पीठ, कंधे और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे इन मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है। मजबूत पीठ शरीर का पोश्चर बेहतर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अर्धचक्रासन के अभ्यास से शरीर में खिंचाव और सक्रियता का एहसास भी हो सकता है। इसे नियमित योगाभ्यास में शामिल करने से शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस में भी फायदेमंद माना जाता है।
हालांकि किसी भी योगासन को अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार और सही तकनीक के साथ करना जरूरी है। इस आसन का अभ्यास करते समय कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आने या चलते-फिरते लड़खड़ाने की समस्या रहती है तो उसे अर्धचक्रासन करने से बचना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से जूझ रहे लोगों को भी पीछे की ओर झुकते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे लोगों को इसे धीरे-धीरे और डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। अभ्यास के दौरान यदि किसी तरह की असहजता, दर्द या चक्कर महसूस हो तो तुरंत आसन रोक देना चाहिए।
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