नई दिल्ली । डेंगू की बीमारी से बचाने वाली टेकेडा फार्मास्युटिकल द्वारा विकसित क्यूडेंगा वैक्सीन को भारत में लाने की तैयारी चल रही है। टेकेडा के साथ डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने भारत में इस वैक्सीन के प्रचार और वितरण को लेकर समझौता किया है। इसके 2027 की पहली छमाही में भारतीय बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है। क्यूडेंगा टेकेडा फार्मास्युटिकल की ओर से विकसित डेंगू वैक्सीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए विकसित किया गया है। यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के बच्चों और वयस्कों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इसकी कुल दो खुराक दी जाती हैं और प्रत्येक खुराक 0.5 मिलीलीटर की होती है। पहली खुराक के तीन महीने बाद दूसरी खुराक दी जाती है।
इसकी एक खास बात यह है कि टीकाकरण से पहले व्यक्ति को डेंगू संक्रमण हो चुका है या नहीं, इसकी जांच करना जरूरी नहीं बताया गया है। भारत में क्यूडेंगा की उपलब्धता जरूरी नियामकीय मंजूरियों और बाजार अनुमति की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भारत के औषधि नियामक ने जुलाई 2026 में इस वैक्सीन को मंजूरी दी थी। इसके बाद डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टेकेडा के बीच समझौते से भारत में इसके प्रचार और वितरण की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। क्लिनिकल परीक्षणों में भी क्यूडेंगा ने डेंगू संक्रमण से बचाव में प्रभाव दिखाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दूसरी खुराक के एक साल बाद पुष्ट डेंगू मामलों के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता 80.2 प्रतिशत रही।
वहीं दूसरी खुराक के 18 महीने बाद डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामलों के खिलाफ प्रभावशीलता 90.4 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, ये आंकड़े क्लिनिकल अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों के बीच वैक्सीन के प्रदर्शन को दर्शाते हैं और वास्तविक जीवन में प्रभाव व्यक्ति तथा परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। भारत में वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद डेंगू की रोकथाम के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। हालांकि, टीकाकरण के बावजूद घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना, मच्छरों के प्रजनन को रोकना, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करना और शरीर को ढककर रखना जैसे उपाय महत्वपूर्ण बने रहेंगे। वैक्सीन लेने से पहले उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के आधार पर डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा।
मालूम हो कि डेंगू भारत में लंबे समय से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित एडीज मच्छरों के काटने से फैलती है। बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। इसी वजह से मानसून और उसके बाद कई क्षेत्रों में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन के साथ मच्छरों के प्रजनन को रोकना और मच्छरों के काटने से बचना भी जरूरी है।
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