नई दिल्ली । आंसू गैस, जिसका इस्तेमाल अक्सर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, रासायनिक रूप से एक परेशान करने वाली गैस है जो शरीर पर तुरंत और तीव्र प्रभाव डालती है। इसके संपर्क में आने पर शरीर के विभिन्न अंगों में असहज प्रतिक्रियाएं होती हैं, जिनकी गंभीरता गैस की मात्रा और संपर्क में रहने के समय पर निर्भर करती है। आंसू गैस का सबसे पहला और सीधा असर अक्सर आंखों पर दिखता है। आंखों में अचानक तेज जलन होने लगती है और लगातार पानी आने लगता है। आंखें लाल हो सकती हैं और कुछ देर के लिए धुंधला भी दिखाई दे सकता है। जलन इतनी ज्यादा हो सकती है कि आंखें अपने आप बंद होने लगें। आमतौर पर, गैस के संपर्क से दूर जाने के बाद यह परेशानी धीरे-धीरे कम हो जाती है।
जब आंसू गैस सांस के साथ अंदर जाती है, तो यह नाक और गले में तीव्र जलन पैदा करती है। इसके बाद तेज खांसी, गले में खराश, घुटन जैसा महसूस होना और सीने में जकड़न हो सकती है। कुछ लोगों को सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज भी आने लगती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या फेफड़ों से जुड़ी कोई बीमारी है, उन्हें इस स्थिति में ज्यादा परेशानी हो सकती है, जिससे सांस लेने में गंभीर कठिनाई बढ़ सकती है। इसके अलावा, नाक से पानी आना, अंदरूनी तेज जलन, गले में सूजन और निगलने में परेशानी भी आम है। कई बार मुंह में लार का उत्पादन भी सामान्य से अधिक हो जाता है। अगर आंसू गैस त्वचा पर लग जाए तो वहां जलन, चुभन, लाल निशान और खुजली जैसी समस्या हो सकती है। ज्यादा गैस लगने पर त्वचा बुरी तरह जल भी सकती है। पसीने या त्वचा पर नमी होने की वजह से जलन और ज्यादा महसूस हो सकती है, इसलिए गैस के संपर्क में आने के बाद त्वचा को अच्छी तरह साफ करना अत्यंत आवश्यक है। कुछ लोगों को जी मिचलाने की शिकायत भी होती है और ज्यादा संपर्क होने पर उल्टी भी हो सकती है। आंसू गैस का असर कितना गंभीर होगा, यह गैस की मात्रा और उसके संपर्क में रहने के समय पर निर्भर करता है। खुली जगह में गैस जल्दी फैल जाती है, लेकिन बंद कमरे या छोटी जगह में इसका असर कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है। ऐसी स्थिति में ज्यादा गैस सांस के साथ अंदर जाने से सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है और फेफड़ों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ऐसी जगह से जितनी जल्दी हो सके बाहर निकलना जरूरी है।
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