सरकारी आंकड़ों से खुलासा, मौसम गर्म होने से बिजली खपत हो रही ज्यादा
नई दिल्ली । त्यौहार से पहले जब बिजली खपत बढ़ जाती है ऐसे में देश बिजली संकट से जूझ रहा है। ऐसा सरकारी डाटा के आंकड़े से पता चला है। इन आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 40 फीसदी कोयले से चलने वाले पावर प्लांट के पास बहुत कम मात्रा में फ्यूल बचा है। दरअसल सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के डाटा से इस बात का पता चला है। इस डाटा के मुताबिक 19 सितंबर तक ऐसे पावर प्लांट जिनके पास कोयले का बहुत कम स्टॉक बचा है, उनकी संख्या 74 हो गई है। पंलांट्स के पास 35 फीसदी से भी कम कोयले का स्टॉक बचा है, जिससे केवल तीन दिन से भी कम समय तक बिजली पैदा हो सकती है। ये संख्या पिछले हफ्ते तक करीब 60 थी जो एक हफ्ते में ही तेजी से बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुतबाकि अलनीनो के असर और मौसम के बदलते मिजाज के कारण ऐसा हो रहा है। इस पीक समय में बिजली की जरूरत भी ज्यादा ही पड़ रही है। अल नीनो और हीट वेव के कारण मौसम जरूरत से ज्यादा गर्म है। इसी की वजह से बिजली की खपत भी ज्यादा हो रही है और प्लांट में कोयले की कमी भी हो रही है। सरकारी डाटा के मुताबिक भारत में बिजली की अधिकतम जरूरत पिछले हफ्ते 230 गीगावाट से 250 गीगावाट के बीच रही तो वहीं मई में बिजली की अधिकतम मांग 270.70 गीगावाट के अब तक के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई थी।
एनालिस्ट्स का कहना है कि पावर प्लांट के स्टॉक में कमी सप्लाई से जुड़ी किसी बुनियादी दिक्कत का संकेत नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स से जुड़ी एक अस्थायी समस्या लगती है। सितंबर की शुरुआत में भारत के कोयला और रेलवे मंत्रालय ने कहा था कि अनिश्चित मानसून की स्थिति के चलते शिपमेंट पर काफी असर पड़ा था, जिसके बाद से ही वो पावर प्लांट में सप्लाई भी बढ़ा रहे हैं। अप्रैल और अगस्त के बीच रिन्यूएबल पावर का प्रोडक्शन करीब 21 फीसदी तक बढ़ा था, लेकिन क्लीन एनर्जी की सप्लाई में उतार-चढ़ाव की वजह से, चौबीसों घंटे बिजली की मांग को पूरा करने में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट की भूमिका अहम बनी रही तो वहीं पिछले हफ्ते की रिपोर्ट में ये सामने आया कि अगस्त में भारत में बिजली उत्पादकों का कोयला आयात भी बढ़ गया था, ये अपने 15 महीने के स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया था। इसके पीछे की वजह हीट वेव और गर्मी थी, ऐसे में जल-बिजली का उत्पादन कम हुआ और बिजली कंपनियों को महंगा कोयला खरीदना पड़ा।


