रांची । झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के इंजीनियरिंग सेल में वर्षों से संविदा पर कार्यरत नौ कर्मचारियों को राहत दी है। हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने उनकी सेवाओं को नियमित करने का आदेश देते हुए संबंधित विभाग को उन्हें सेवा में पुनर्बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने 14 अगस्त 2024 को उनकी नियमितीकरण की मांग खारिज करने वाले विभागीय आदेशों को भी रद्द कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं में धरो उरांव, अरुण कुमार साहू, गौतम प्रसाद सिंह, आशीष रंजन, प्रदीप बड़ा, विष्णु देव शाह, अरविंद कुमार सिंह, अजय कुमार रजक और संतोष कुमार राम शामिल हैं।
ये क्लर्क, ड्राइवर, टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट और पंप ऑपरेटर जैसे पदों पर कार्यरत थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय तक बिना सेवा में किसी अंतर के काम किया है और रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि वे स्वीकृत पदों पर कार्यरत थे। ऐसे में केवल संविदा कर्मचारी होने का आधार बनाकर उनकी सेवा समाप्त करना और नियमितीकरण से इनकार करना उचित नहीं है। अदालत ने 14 अगस्त 2024 के नियमितीकरण संबंधी आदेशों को रद्द करते हुए भवन निर्माण विभाग को नौ याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल करने और औपचारिक नियमितीकरण आदेश जारी करने का निर्देश दिया। यह प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां वर्ष 2004 से 2008 के बीच हुई थीं। सभी को स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में संविदा के आधार पर सपोर्ट स्टाफ के रूप में नियुक्त किया गया था। विभागीय समिति की मंजूरी से उनकी संविदा अवधि समय-समय पर बढ़ाई जाती रही। जनवरी 2017 तक उन्हें मानदेय और भत्ते का भुगतान भी किया गया। इसके बाद उन्हें काम करने की अनुमति नहीं दी गयी। हालांकि उनकी सेवा समाप्ति के संबंध में कोई औपचारिक आदेश या कारण नहीं बताया गया।


