शुरुआत से पढ़ाई और प्रीवियस ईयर क्वेश्चन्स पर फोकस को बताया सफलता का राज
गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल भंडारकोला के छात्र से खास बातचीत
देवघर। सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा के शानदार परिणाम के बाद गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल, भंडारकोला,देवघर के छात्र स्वस्तिक राज ने झारखंड स्टेट टॉपर बनकर अपने स्कूल, परिवार और देवघर का नाम रोशन किया है। स्वस्तिक ने अपनी सफलता के पीछे शुरू से की गई मेहनत, लगातार पढ़ाई और परीक्षा के अंतिम चरण में
प्रीवियस ईयर क्वेश्चन्स पर फोकस को अहम बताया। डॉक्टर बनने का लक्ष्य रखने वाले स्वस्तिक राज से पढ़ाई, तैयारी और सफलता के सफर को लेकर संताल एक्सप्रेस के विशेष संवाददाता शेखर सुमन ने की खास बातचीत।
सवाल: 10वीं में झारखंड स्टेट टॉपर बनने के बाद कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब: बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। मैंने शुरू से ही मेहनत की और लगातार पढ़ाई पर ध्यान दिया। इतनी बड़ी सफलता मिलेगी, यह खुशी मेरे लिए खास है।
सवाल: आपकी सफलता का सबसे बड़ा राज क्या रहा?
जवाब: सफलता का सबसे बड़ा राज लगातार मेहनत है। मैंने शुरुआत से ही पढ़ाई को गंभीरता से लिया। पेपर और सिलेबस को समय पर पूरा करने की कोशिश की और परीक्षा के अंतिम चरण में पिछले वर्षों के प्रश्नों पर ज्यादा फोकस किया।
सवाल: आपने अपनी तैयारी कब से शुरू कर दी थी?
जवाब: मैंने शुरुआत से ही तैयारी शुरू कर दी थी। मेरा मानना है कि आखिरी समय में ज्यादा दबाव लेने के बजाय अगर शुरुआत से थोड़ी-थोड़ी पढ़ाई की जाए तो तैयारी बेहतर होती है।
सवाल: आपकी पढ़ाई का टाइम-टेबल कैसा था?
जवाब: मेरा कोई फिक्स टाइम-टेबल नहीं था। जिस विषय को पढ़ने की जरूरत महसूस होती थी, मैं उसी पर ध्यान देता था। मेरा मुख्य लक्ष्य पढ़ाई को समझकर और पूरा करके आगे बढ़ना था।
सवाल: आप रोज कितने घंटे पढ़ाई करते थे?
जवाब: मैं घंटे के हिसाब से पढ़ाई नहीं करता था। मैं एक टॉपिक लेकर उसे पूरा करने पर ध्यान देता था। जब तक टॉपिक अच्छी तरह समझ नहीं आ जाता था, तब तक पढ़ता रहता था।
सवाल: कौन-सा विषय आपको सबसे आसान और कौन-सा सबसे कठिन लगा?
जवाब: मेरे लिए संस्कृत सबसे आसान विषय था, क्योंकि इसमें मेरी रुचि थी। वहीं इतिहास थोड़ा कठिन लगा, क्योंकि इसमें बहुत सारी जानकारियां याद रखनी पड़ती हैं।
सवाल: आपने कोचिंग की थी या सेल्फ स्टडी पर ज्यादा भरोसा किया?
जवाब: मैंने सेल्फ स्टडी पर ज्यादा फोकस किया। मैं खुद किताबों से पढ़ता था और जरूरत पड़ने पर शिक्षकों से मार्गदर्शन लेता था। हमारे स्कूल में बहुत अच्छे शिक्षक हैं। मैं हर रविवार इंटीग्रेटेड टेस्ट देने भी आता था। केशव सर ने भी मुझे काफी समय से मार्गदर्शन दिया है।
सवाल: आपकी सफलता में स्कूल और शिक्षकों का कितना योगदान रहा?
जवाब: स्कूल और शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ सही दिशा में तैयारी करने के लिए लगातार मार्गदर्शन दिया। जहां भी मुझे परेशानी होती थी, शिक्षक उसे समझाने में मदद करते थे।
सवाल: आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर आपका क्या लक्ष्य है?
जवाब: मेरा लक्ष्य डॉक्टर बनना है। आगे इसी दिशा में मेहनत करना चाहता हूं। अभी मैंने पीजीपी लिया है और आगे की पढ़ाई पर पूरा ध्यान रहेगा।
सवाल: परीक्षा की तैयारी कर रहे दूसरे विद्यार्थियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब: मैं दूसरे विद्यार्थियों से यही कहना चाहूंगा कि तैयारी आखिरी समय के लिए न छोड़ें। शुरुआत से पढ़ाई करें, कक्षाओं में ध्यान दें और सबसे ज्यादा कॉन्सेप्ट को समझने पर फोकस करें। अगर बेसिक कॉन्सेप्ट मजबूत होगा तो 11वीं और 12वीं की पढ़ाई में भी काफी मदद मिलेगी।
सवाल: अपने बारे में कुछ बताइए।
जवाब: मेरा नाम शास्तिकर है। मैं देवघर का रहने वाला हूं। मेरे पिता का नाम रविशंकर है और मेरी माता का नाम कुमारी प्रियंका है।
सवाल: आपके पिता क्या करते हैं और आपकी मां क्या करती हैं?
जवाब: मेरे पिता एक इंश्योरेंस कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। मेरी मां गृहिणी हैं। दोनों ने मेरी पढ़ाई और तैयारी में हमेशा मेरा साथ दिया है।
सवाल: झारखंड टॉपर बनने के बाद सबसे पहले किसे इसका श्रेय देना चाहेंगे?
जवाब: सबसे पहले मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने मेरी तैयारी के दौरान मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे सही मार्गदर्शन दिया।


