संताल एक्सप्रेस
पाकुड़। जिले के हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में जून 2024 में हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पाकुड़ की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए सभी नौ अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी के तहत प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
पति को बंधक बनाकर वारदात को दिया था अंजाम
मामला हिरणपुर थाना कांड संख्या 35/2024 से संबंधित है। प्राथमिकी के अनुसार, एक जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे 19 वर्षीय पीड़िता अपने पति के साथ सहरपुर स्थित काजू बागान में घूमने गई थी। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और पीड़िता के पति को पकड़कर बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता के साथ जबरदस्ती की और उसे झाड़ियों की ओर ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद दो जून 2024 को हिरणपुर थाना में मामला दर्ज किया गया था।
छह गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई सत्र वाद संख्या 143/2024 के तहत हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल छह गवाह प्रस्तुत किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने नौ अभियुक्तों को दोषी करार दिया।दोषी ठहराए गए अभियुक्तों में मानवेन मरांडी (28), चंदन सोरेन उर्फ चांद सोरेन (29), विवेक सोरेन (22), लखीराम मृधा उर्फ बाबूलाल मरांडी (22), जेने हांसदा (27), विश्वनाथ हेम्ब्रम (24), पांडु हेम्ब्रम (30), मिस्त्री हेम्ब्रम (30) और सकल हांसदा (34) शामिल हैं। सभी अभियुक्त हिरणपुर थाना क्षेत्र के कस्तूरी गांव के निवासी हैं।
कम उम्र का हवाला देकर राहत की मांग खारिज
सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अभियुक्तों की उम्र को देखते हुए नरमी बरतने की अपील की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की घटना पीड़िता को गहरे मानसिक और शारीरिक आघात से गुजरने के लिए मजबूर करती है और ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति समाज में कठोर संदेश जाना आवश्यक है।
अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर संबंधित दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि जुर्माने से प्राप्त पूरी राशि पीड़िता को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में दी जाए।इसके साथ ही अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), पाकुड़ को ‘विक्टिम कंपनसेशन स्कीम’ के तहत पीड़िता के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजा निर्धारित करने का भी निर्देश दिया है। अदालत के इस फैसले को मामले में न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


