◆रोस्टर क्लीयरेंस को लेकर उच्च शिक्षा निदेशालय रांची में 21 अगस्त को होगी बैठक
विशेष संवाददाता
दुमका । राज्य में नौकरियों को लेकर मचे बवाल के बीच उच्च शिक्षा क्षेत्र से एक अच्छी खबर है। राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों और पदाधिकारियों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। रिक्त पदों के विरुद्ध रोस्टर क्लीयरेंस को लेकर उच्च शिक्षा निदेशालय में एक दौर की उच्चस्तरीय बैठक हो चुकी है।अगली बैठक 21 अगस्त को रांची में होगी। बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को बुलाया गया है। उच्च शिक्षा निदेशक के स्तर से जारी पत्र के अनुसार 21 अगस्त को होने वाली बैठक में सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार शामिल होंगे। बैठक में विश्वविद्यालयवार रिक्त पदों, आरक्षण रोस्टर और रोस्टर क्लीयरेंस की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। माना जा रहा है कि विभाग इस प्रक्रिया को जल्द पूरा कर नियुक्ति के लिए आवश्यक आधार तैयार करना चाहता है।
नए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत अब विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों से लेकर पदाधिकारियों तक की नियुक्ति विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से की जानी है। इससे पहले विश्वविद्यालयों में इन पदों पर नियुक्तियां जेपीएससी के माध्यम से होती थीं।हालांकि विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन की प्रक्रिया अभी सरकार के स्तर पर लंबित है। ऐसे में उच्च शिक्षा निदेशालय फिलहाल विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों का आंकड़ा तैयार करने और उससे संबंधित आरक्षण रोस्टर को क्लीयर कराने की प्रक्रिया में जुटा है। विभाग की कवायद को इस रूप में देखा जा रहा है कि विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने में किसी तरह की प्रशासनिक अड़चन न आए। इसके लिए रिक्त पदों और रोस्टर क्लीयरेंस का काम पहले ही पूरा कर लेने की तैयारी है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों दुमका में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने संकेत दिया था कि विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से कॉलेज शिक्षकों की होने वाली पहली नियुक्ति प्रक्रिया वर्ष 2027 के प्रथम छमाही में पूरी हो सकती है।ऐसे में 21 अगस्त को राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों के साथ होने वाली बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग की मौजूदा कवायद को 2027 के प्रथम छमाही तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।बता दें कि राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इन रिक्तियों के कारण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।


