1947 में एक रुपए से ही पूरी होती थीं कई ज़रूरतें
नई दिल्ली । आजकल 20-25 हज़ार रुपये की मासिक आय में घर चलाना कई परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बढ़ते किराए, बिजली बिल, शिक्षा और राशन के खर्चों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। ऐसे में, ज़रा सोचिए कि आज से 77 साल पहले, जब देश आज़ाद हुआ था, तब सिर्फ़ एक रुपये की क्या अहमियत थी? 1947 में एक रुपये की क्रय शक्ति इतनी अधिक थी कि आज लाखों रुपये भी उसके सामने फीके पड़ते हैं। आइए जानते हैं कि उस दौर में सिर्फ एक रुपये से क्या-क्या खरीदा जा सकता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1947 में गेहूं का आटा लगभग 30 पैसे प्रति किलो मिलता था, यानी एक रुपये में आप करीब 3.3 किलो आटा खरीद सकते थे। वहीं चावल की कीमत करीब 12 पैसे प्रति किलो थी, जिससे एक रुपये में लगभग 8 किलो चावल खरीदे जा सकते थे। चीनी भी करीब 40 पैसे प्रति किलो थी, यानी एक रुपये में लगभग 2.5 किलो चीनी मिल जाती थी। दूध की बात करें तो 1947 में यह करीब 12 पैसे प्रति लीटर था, जिससे एक रुपये में लगभग 8 लीटर दूध उपलब्ध था। आलू 25 पैसे प्रति किलो मिलते थे, यानी एक रुपये में 4 किलो आलू। इतना ही नहीं उस समय एक रुपये में पूरे हफ्तेभर की सब्जियां खरीदी जा सकती थीं। आज जहां सोना खरीदना आम आदमी के लिए एक सपना जैसा है, वहीं 1947 में 10 ग्राम सोने का भाव मात्र 88.62 रुपये था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले आठ दशकों में महंगाई ने कैसे हर वस्तु की कीमत को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है और एक रुपये की कीमत कितनी कम हो गई है।,


