नई दिल्ली । अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले दान में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में अदालत ने साफ संकेत दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और पेशेवर तरीके से होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी के पुनर्गठन पर आवश्यक निर्देश लेने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या एसआईटी मामले की जांच कर रही है, मेहता ने कहा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया था।
अब इसकी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। एसआईटी ने अभी पाया कि यह एक संज्ञेय अपराध है। पीठ ने कहा कि दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक उस एसआईटी का हिस्सा थे और पूछा कि क्या वे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य जांच कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि वह अगले सोमवार को मामले की सुनवाई करेगी और कुछ निर्देश पारित करेगी। 13 जुलाई को पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसने कथित दान चोरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस भी जारी किया था।


