रांची । झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के डीजीपी से पूछा है कि झारखंड के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी क्यों इंस्टॉल नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है। कोर्ट ने मामले में डीजीपी को राज्य के पुलिस थाना में सीसीटीवी लगाने के संबंध में 27 जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी इंस्टॉलेशन का भौतिक सत्यापन हाईकोर्ट झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) और संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) से भी कर सकती है। कोर्ट ने मामले में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि 29 जून तक शपथ पत्र दाखिल कर बताना है कि संबंधित मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।
इससे पहले सरायकेला एसपी ओर से शपथ पत्र दाखिल कर कोर्ट को बताया गया था कि सरायकेला पुलिस थाना में सीसीटीवी लगाने की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसपर कोर्ट ने कहा कि इस तरह के जवाब से कोर्ट असंतुष्ट है। मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने पक्ष रखा। अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रत्याशी रह चुके तरुण महतो की पुलिस कस्टडी में पिटाई से संबंधित कोर्ट के स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की गुरुवार को सुनवाई की। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरायकेला एसपी को बताने को कहा है कि उनके जिला में पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के संबंध में क्या कार्रवाई हुई।
कोर्ट ने मामले में प्रधान सचिव हेल्थ से भी पूछा था कि जिस मेडिकल ऑफिसर ने कोर्ट में तरुण महतो को कोर्ट में पेश करने के समय फिट फॉर कस्टडी का सर्टिफिकेट दिया था, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। लेकिन आज सुनवाई के दौरान संबंधित मेडिकल ऑफिसर के कार्रवाई के संबंध में सरकार का कोई जवाब नहीं आया जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। यहां बता दें कि वर्ष 2024 के चुनाव में तरुण महतो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के इचागढ़ प्रत्याशी जा चुके हैं. 19 नवंबर 2025 को रात में इचागढ़ पुलिस उन्हें पड़कर थाने ले गई, जहां हिरासत में उनकी बर्बरता से पिटाई की गई थी. उनपर थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर इचागढ़ पुलिस ने उन्हें काफी टॉर्चर किया था. इसे लेकर उनकी पत्नी की ओर से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा गया था. इसपर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था. मामले में पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने एसपी सरायकेला को दस्तावेज के साथ बुलाया भी था.


