कोलकाता । पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम ज़िला स्थित बेलपहाड़ी में माओवादी आंदोलन से लंबे समय से जुड़ी नेता पुष्पा उर्फ शकुंतला उर्फ वर्षा ने बुधवार को कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। वर्ष 2001 से माओवादी गतिविधियों से जुड़ी रहीं पुष्पा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें नहीं लगता कि आंदोलन आगे अधिक दूर तक बढ़ पाएगा, इसलिए उन्होंने सरकार की पुनर्वास संबंधी नीतियों और आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए यह कदम उठाया है।
वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की सदस्य थी और झारखंड-ओडिशा-बिहार सीमाओं के पार सारंडा वन क्षेत्र से संचालित होती थी।उस पर 10 लाख का इनाम था। पुलिस ने आत्मसमर्पण के दौरान एक एसएलआर राइफल, एक मैगज़ीन और 37 राउंड गोला-बारूद बरामद किया।
बुधवार को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण के बाद दलमा दस्ते की जोनल कमेटी की सदस्य पुष्पा ने पुलिस आयुक्त अजय नंद की उपस्थिति में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आवास उपलब्ध कराने और परिवार के साथ रहने की व्यवस्था किए जाने के आश्वासन ने उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि वर्तमान में जिस प्रकार का आंदोलन चल रहा है, उसके अधिक आगे बढ़ने की संभावना उन्हें नहीं दिखाई देती।
पुष्पा का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पिछले महीने झारखंड क्षेत्र की वरिष्ठ माओवादी श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को कोलकाता पुलिस ने उत्तर काशीपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। नदिया जिले के चाकदह निवासी बेला झारखंड क्षेत्रीय समिति की सदस्य थीं और लंबे समय से झारखंड में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।
इसके अलावा हुगली जिले के जंगीपाड़ा निवासी माधाई पात्र भी पहले आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब पुष्पा के मुख्यधारा में लौटने के साथ आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व माओवादी नेताओं की सूची में एक और नाम जुड़ गया है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लगातार चल रहे आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी अभियान से माओवादी संगठन की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ रहा है तथा कई सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने में रुचि दिखा रहे हैं।


