जबरदस्त न्यूट्रिशनल वैल्यू के कारण सुपर मदर ग्रेन बना विदेशी किनोवा अनाज
नई दिल्ली । आज के मार्केट में हेल्थ और फिटनेस को लेकर लोग ज्यादा कॉन्शियस हो गए हैं। इसी वजह से एक विदेशी अनाज की डिमांड इंटरनेशनल और लोकल मार्केट में बढ़ गई है। इस अनाज का नाम है किनोवा। अपनी जबरदस्त न्यूट्रिशनल वैल्यू के कारण इसे सुपर मदर ग्रेन कहा जाता है। पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और सरसों के मुकाबले इसकी खेती किसानों के लिए एक बहुत ही प्रॉफिटेबल बिजनेस साबित हो रही है। खास बात यह है कि किनोवा की खेती में लागत बहुत कम आती है और यह कम समय में तैयार होकर बड़ा मुनाफा देती है। अगर हमारे देश के किसान किनोवा की एडवांस फार्मिंग करें तो यह उनके लिए अमीर बनने का शॉर्टकट बन सकती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मूल रूप से अमेरिका की एंडीज पहाड़ियों पर उगने वाला किनोवा दिखने में भले ही हमारे देश के बथुआ कुल का पौधा लगता है, लेकिन यह उससे काफी अलग है। जहां बथुआ की पत्तियों का इस्तेमाल होता है वहीं किनोवा के बीजों को बिल्कुल गेहूं और धान की तरह यूज किया जाता है। इसे एक कूट अनाज माना जाता है जो न्यूट्रिशन का पावरहाउस है। इसके छोटे-छोटे बीजों के अंदर भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट्स, विटामिन्स और जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। आजकल के दौर में डॉक्टरों से लेकर डाइटिशियन तक हर कोई फिट रहने के लिए इसे खाने की सलाह दे रहा है।
इस विदेशी फसल की खेती का तरीका हमारे यहां के पारंपरिक तौर-तरीकों से अलग है। इसकी अच्छी ग्रोथ के लिए भुरभुरी मिट्टी और 18 से 24 डिग्री सेल्सियस का बढ़िया तापमान सबसे बेस्ट है। खेत तैयार करते समय मिट्टी की क्वालिटी पर विशेष ध्यान देना पड़ता है ताकि बीजों का अंकुरण सही से हो सके। इसकी फसल में लाल, हरे और बैंगनी रंग के पौधे आपके पूरे खेत को शानदार लुक देते हैं। किनोवा की सबसे अच्छी बात यह है कि यह कम पानी और कम देखरेख में भी बहुत बेहतरीन पैदावार दे देती है। इंटरनेशनल मार्केट में भारी डिमांड होने के कारण इसकी फसल बहुत महंगे दामों पर बिकती है जिससे किसानों को अपनी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा रिटर्न मिलता है।


