नई दिल्ली । दुनियाभर में एक बार फिर इबोला वायरस का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। अफ्रीका के कई देशों में तेजी से फैल रहे संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की है। इन देशों में इबोला संक्रमण के सैकड़ों मामले सामने आने और बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां चिंतित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को गंभीर बताया गया है।
जानकारी के अनुसार कांगो में इबोला का प्रकोप सबसे ज्यादा बढ़ा है। वहां बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कांगो सरकार के अनुसार देश के पूर्वी हिस्से में संदिग्ध मामलों की संख्या 900 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही अधिक होने के कारण युगांडा में भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। वहीं दक्षिण सूडान में कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते हालात और गंभीर माने जा रहे हैं। इबोला वायरस को अत्यधिक संक्रामक माना जाता है और यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैलता है। गंभीर स्थिति में यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी भी सख्त कर दी है। कांगो, युगांडा, दक्षिण सूडान और उनके पड़ोसी देशों से आने वाले यात्रियों की प्रमुख हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर मेडिकल स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी यात्री में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, बदन दर्द या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत आइसोलेशन में रखा जाए। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों के बड़े सरकारी अस्पतालों को भी विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में अफ्रीका से लौटे भारतीय नागरिकों से अपील की है कि यदि वे अस्वस्थ महसूस करें तो तुरंत स्वास्थ्य अधिकारियों को अपनी यात्रा संबंधी जानकारी दें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सावधानी बरतने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
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