नई दिल्ली । भारत में निर्मित ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणाली की वैश्विक मांग लगातार बढ़ती जा रही है। सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया के कई अरब देशों ने भारत से इन मिसाइलों की खरीद में रुचि दिखाई है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं ने रक्षा तैयारियों को और तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर जैसे देशों ने भारत से रक्षा खरीद को लेकर संपर्क किया है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रक्षा और विदेश मंत्रालय स्तर पर बातचीत जारी होने की जानकारी सामने आई है।
भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत तैयार की जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को दुनिया की सबसे आधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 300 किलोमीटर तक बताई जाती है। वहीं आकाश मिसाइल प्रणाली मध्यम दूरी तक दुश्मन के विमानों और ड्रोन हमलों को नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है। हाल के वर्षों में भारतीय रक्षा तकनीक को लेकर दुनिया के कई देशों की रुचि बढ़ी है और भारत भी रक्षा निर्यात को नई रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रहा है। सूत्रों का कहना है कि फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के बाद अब कई अन्य देश भी इस रक्षा प्रणाली को खरीदने के इच्छुक हैं। पहले से करीब आधा दर्जन देश ब्रह्मोस के लिए कतार में बताए जा रहे थे और अब अरब देशों की दिलचस्पी ने इसकी मांग को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मिसाइल तकनीक कम लागत और उच्च क्षमता के कारण वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से मजबूत स्थिति बना रही है।
इस बीच सऊदी अरब की ओर से अभी तक भारत से किसी औपचारिक रक्षा खरीद प्रस्ताव की जानकारी नहीं मिली है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंधों के कारण सऊदी अरब फिलहाल संतुलित रुख अपनाए हुए है। हालांकि क्षेत्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे में रक्षा साझेदारियों के नए समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भारत के लिए यह अवसर रक्षा निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक रणनीतिक प्रभाव मजबूत करने के रूप में भी देखा जा रहा है।


