नई दिल्ली । भारत में तलाक तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए समाज और परिवार की मानसिकता भी तेजी से बदल रही है। तलाक के बाद दूसरी शादी को स्वीकार करने की मान्यता परिवार और समाज में बढती जा रही है।
भारतीय समाज में इन दिनों तलाकशुदा, विधवा और विधुर जीवन साथी की तलाश कर रहे हैं। एक बार तलाक हो जाने के बाद वह दूसरी शादी करने के पहले काफी सतर्कता बरती जा रही है। तलाक का अनुभव उन्हें परिपक्व बना रहा है। दूसरी शादी के बाद संबंध स्थाई और बेहतर हों। इस समझ के साथ अपना जीवन साथी चुन रहे हैं।
दूसरी शादी के बाद पति-पत्नी अपनी-अपनी जिम्मेदारियां का एहसास करते हैं। जिसके कारण दूसरी शादी के बाद पति-पत्नी के रिश्तो में समझ ज्यादा होती है।
मेट्रोमोनियल प्लेटफार्म में दूसरी शादी, विधुर और विधवा जीवनसाथी के तलाश में है ।
पिछले एक दशक में दूसरी शादी के इच्छुक लोगों की संख्या में लगभग 48 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। 2016 के बाद से यह ट्रेड बड़ी तेजी के साथ बदल रहा है। 10 में से 6 शादियां ही सफल हो रही हैं। चार शादियों में तलाक देखने को मिलने लगे हैं।
28 फ़ीसदी तलाकशुदा पुरुष और महिला अपने लिए दूसरे जीवनसाथी की तलाश में मैट्रिमोनियल साइट का सहारा ले रहे हैं। इस परिवर्तन को अब समाज और परिवार ने भी स्वीकार कर लिया है। दूसरी शादी में अब धार्मिक और जाति समीकरण को इग्नोर करने की स्थिति बनने लगी है। भारत में यह सबसे बड़ा सामाजिक एवं पारिवारिक बदलाव है।
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