देश में नहीं होगी गैस की कमी, 40000 करोड़ की परियोजना तैयार
नई दिल्ली । होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद भारत अब एक महाप्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। तकरीबन 40000 करोड़ की इस परियोजना के सफल रहने पर आने वाले कई दशकों तक भारत में गैस की कमी नहीं होगी। बता दें पश्चिम एशिया में तनाव के चलते एशिया से लेकर यूरोप तक में एनर्जी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे भारत पर भी असर पड़ा है।
भारत एक एनर्जी डिपेंडेंट कंट्री है। तेल और गैस का ज्यादा हिस्सा खाड़ी के देशों से आयात किया जाता है। ऐसे में ईरान युद्ध की वजह से वेस्ट एशिया में मचे उथल-पुथल का असर भारत पर भी पड़ रहा है। दरअसल, भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र से निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ओमान से सीधे गहरे समुद्र के रास्ते गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। होर्मुज संकट के बाद ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर गंभीरता से काम कर रही है। अनुमानित 40 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर इसे पूरा होने में पांच से सात साल लग सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि भारत अब एलएनजी के स्पॉट बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलना चाहता है। भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है. ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और एनर्जी-मिक्स में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयासों के बीच वर्तमान खपत करीब 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है, जो 2030 तक बढ़कर करीब 290-300 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी अवधि तक एलएनजी आयात 180-200 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।
प्रोजेक्ट रूट इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह ओमान और यूएई के रास्ते अरब सागर से होकर गुजरे और भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से बचा जा सके। इस पाइपलाइन के जरिए भारत को ओमान, यूएई, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर जैसे देशों के विशाल गैस भंडार तक पहुंच मिल सकेगी। इन देशों के पास संयुक्त रूप से करीब 2,500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार मौजूद हैं।
बताया जा रहा है कि पाइपलाइन समुद्र की सतह से करीब 3,450 मीटर की गहराई तक बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। इस परियोजना को आगे बढ़ाने के पीछे हालिया होर्मुज संकट एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। एशियाई स्पॉट एलएनजी कीमतों का प्रमुख इंडेक्स प्लैट्स जेकेएम सामान्य परिस्थितियों में जहां 10-12 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के आसपास था, वहीं भू-राजनीतिक संकट के दौरान यह बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गया। इस घटनाक्रम ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति और मूल्य स्थिरता से जुड़ी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।


