कोटा । नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को देशभर में ऑफलाइन मोड में हुई नीट-यूजी, 2026 परीक्षा को मंगलवार को रद्द कर दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से अनुमति के बाद अब यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जायेगी, इसके लिये परीक्षार्थियों को दोबारा पंजीयन नहीं करवाना है। साथ ही, इसके लिये परीक्षार्थियों से कोई परीक्षा शुल्क नहीं लिया जायेगा। उनके द्वारा जमा राशि भी लौटाई जायेगी। अभ्यर्थियों को नीट-यूजी, 2026 के लिये फिर से प्रवेश पत्र जारी किये जाएंगे। एनटीए के अनुसार इस वर्ष कुल 22,79,746 परीक्षार्थियों ने नीट परीक्षा दी थी, जिसमें 13,32,928 (58.46 प्रतिशत) छात्रायें एवं 9,46,815 (41.54 प्रतिशत) छात्र शाामिल हुये थे। इस वर्ष 3,38,113 छात्राएं अधिक रहीं। देश के सभी परीक्षा केंद्रों पर 3 मई को हुई इस परीक्षा में राजस्थान के कुछ केंद्रों पर पेपर लीक होने की सूचना मिलने पर केंद्रीय जांच एजेंसियों एवं राजस्थान की स्पेशल आपरेशन ग्रुप ने इसकी गहराई से पड़ताल की। परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता बनाये रखने के लिये छात्र हित में इसे दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।
परीक्षा होने के चार दिन बाद 7 मई देर शाम को एनटीए को राजस्थान के कुछ परीक्षा केंद्रों पर पेपर लीक या परीक्षा से पहले डमी पेपर बेचने जैसी संदिग्ध गतिविधियों के इनपुट प्राप्त हुये। एजेंसी ने मामले की गहराई से जांच और आवश्यक कदम उठाने के लिये सारे दस्तावेज व इनपुट केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपे। मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से अनुमति मिलने पर यह परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा की अगली तिथि के लिये वेबसाइट पर अधिकृत सूचना जारी कर दी जायेगी। केंद्र सरकार ने परीक्षा के दौरान हुई संभावित गड़बडी की जांच सीबीआई से करवाने के निर्देश दिये हैं, जिसमें एनटीए सभी परीक्षा सामग्री, सारे रिकॉर्ड एवं पूछताछ आदि सीबीआई को सौंपकर पूरा सहयोग करेगी। इस परीक्षा के माध्यम से मेडिकल, डेंटल, आयुष, वेटरनरी और चयनित नर्सिंग कॉलेजों में करीब 2.65 लाख सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। भारत में अब 820़ मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की लगभग एक लाख 29़ सीटें उपलब्ध हैं। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 63,000़ तथा निजी, डीम्ड, अन्य मेडिकल कॉलेजों में लगभग 65,000़ सीटें शामिल हैं। इसके अलावा बीडीएस की लगभग 27,926 सीटें हैं। आयुष पाठ्यक्रम में बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीएसएमएस, बीवीएससी एवं एएच व चयनित बीएससी नर्सिंग के लिए लगभग 67,303 सीटों पर भी नीट-यूजी के माध्यम से प्रवेश दिया जायेगा।
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नीट-यूजी पुनर्परीक्षा का शेड्यूल 7-10 दिनों में जारी होगा : एनटीए डीजी
नई दिल्ली । राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंगलवार को कहा कि रद्द की गई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 परीक्षा की पुनर्परीक्षा का पूरा शेड्यूल अगले सात से 10 दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एजेंसी अकादमिक कैलेंडर और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द से जल्द परीक्षा कराने की तैयारी कर रही है। अभिषेक सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘हम अपनी टीम के साथ परीक्षा की नई तारीख पर चर्चा कर रहे हैं। अगले सात से 10 दिनों में पूरा शेड्यूल बता देंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि मेडिकल एडमिशन के अकादमिक कैलेंडर पर असर न पड़े। ‘ उन्होंने कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला कथित पेपर लीक और प्रश्नपत्र से मेल खाते कुछ सवालों की जानकारी मिलने के बाद लिया गया। सिंह के अनुसार, सात मई की रात एक व्हिसलब्लोअर के जरिए व्हाट्सऐप पर प्रसारित एक पीडीएफ की जानकारी मिली, जिसमें कुछ सवाल परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खा रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं कहूंगा कि पूरा पेपर लीक हुआ था, लेकिन अगर एक भी प्रश्न हमारे मूल प्रश्नपत्र से मेल खाता है तो हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘जीरो एरर’ नीति का उल्लंघन होता है। इसी आधार पर हमने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। ‘ सिंह ने कहा कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है और एजेंसी ने निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि जांच में यह सामने आएगा कि कथित गड़बड़ी कहां से शुरू हुई, कितने लोग और कितने राज्य इसमें शामिल थे। उन्होंने कहा, ‘चाहे कोई अंदर का हो या बाहर का, जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हमने सीबीआई से कहा है कि दोषियों को गिरफ्तार कर सजा दिलाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। ‘ एनटीए महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्परीक्षा के लिए छात्रों को दोबारा पंजीकरण नहीं करना होगा। मौजूदा आवेदन, परीक्षा केंद्र और अभ्यर्थियों का डेटा मान्य रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों से पुनर्परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और पहले ली गई परीक्षा फीस भी वापस की जाएगी। सिंह ने कहा कि एजेंसी 22 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों की चिंता को समझती है तथा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान मीडिया के सवालों से बचते दिखे
नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को प्रश्नपत्र लीक और व्यापक अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द किया गया है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पत्रकारों द्वारा पेपर लीक विवाद से संबंधित सवालों का जवाब देने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया, इससे मोदी सरकार की ओर से पारदर्शिता की कमी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परीक्षा रद्द होने से छात्रों में गहरा सदमा और आक्रोश है। कई कोचिंग केंद्रों में छात्र इस घटनाक्रम पर रोते हुए दिखाई दिए, जो उनके भावनात्मक प्रभाव को दर्शाता है। केंद्र सरकार ने अभी तक इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रेसवार्ता आयोजित नहीं की है, जिससे प्रभावित छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता बनाए रखने और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में विश्वास को बरकरार रखने के लिए लिया गया है। केंद्र सरकार ने इन अनियमितताओं की विस्तृत जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। मूल रूप से 3 मई को भारत के 551 शहरों और अन्य देशों के 14 शहरों में लगभग 23 लाख पंजीकृत परीक्षार्थियों के लिए आयोजित की गई यह परीक्षा अब पुन: आयोजित की जाएगी।
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महाराष्ट्र के नासिक से प्रिंटिंग प्रेस संचालक गिरफ्तार
नासिक । मेडिकल प्रवेश के लिए आयोजित नीट परीक्षा 2026 की प्रश्नपत्रिका लीक मामले में महाराष्ट्र के नासिक का कनेक्शन सामने आया है। इस मामले में नासिक स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस के संचालक की संलिप्तता उजागर हुई है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी नासिक पुलिस आयुक्तालय के क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त किरण चव्हाण, सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके और परिमंडल दो के पुलिस उपायुक्त किशोर काले ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में दी। पुलिस के अनुसार, 03 मई को देशभर में नीट परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन उससे पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। इस घटना से देशभर के लाखों छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया है। जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया था। इसके बाद इस प्रश्नपत्र के हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल जैसे राज्यों तक पहुंचने के संदिग्ध रास्ते भी उजागर हुए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और और भी लोगों से पूछताछ की संभावना है। इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष आकाश छाजेड ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाकर दोषियों को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की है। साथ ही इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की गई है। छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाली इस घटना से देशभर में गुस्सा और चिंता का माहौल है।
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सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी, जांच शुरू
नई दिल्ली । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। सीबीआई ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और साक्ष्य नष्ट करने से संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया है। सीबीआई ने कहा कि आरोप परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता और विश्वसनीयता से समझौते की आशंका को दर्शाते हैं। एजेंसी ने मामले की व्यापक जांच शुरू कर दी है ताकि कथित अनियमितताओं की प्रकृति और दायरे के साथ इसमें शामिल व्यक्तियों एवं संस्थाओं की भूमिका का पता लगाया जा सके। सीबीआई के अनुसार मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित कर विभिन्न स्थानों पर भेजी गई हैं। एजेंसी ने कहा कि मामले में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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जयपुर से दो युवक हिरासत में
नई दिल्ली । देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 को लेकर एक बड़ा फैसला आया, जिसने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा की शुचिता और छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर नीट 2026 परीक्षा को रद्द करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। इसी बीच, राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने पेपर लीक मामले में जयपुर से दो संदिग्धों, मनीष यादव और अविनाश लांबा, को हिरासत में लिया है। जयपुर से मनीष और अविनाश लांबा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया को इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन दोनों की भूमिका उस संगठित नेटवर्क को फैलाने में थी, जो कि परीक्षा से पहले ही क्वेश्चन बैंक के नाम पर पेपर की सामग्री लीक की थी। हिरासत में लिए गए इन युवकों से विस्तृत पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे पेपर लीक के पीछे के पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है। एसओजी अब इस बात की तह तक जा रही है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार देश के किन-किन शहरों से जुड़े हैं। एसओजी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल विशाल बंसल ने मामले के तकनीकी और आपराधिक पहलुओं पर प्रकाश डाला है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा से लगभग 15 दिन से एक महीने पहले तक 150 पन्नों का एक गेस पेपर छात्रों के बीच तेजी से सर्कुलेट हो रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गेस पेपर में से 120 सवाल असली परीक्षा में हूबहू पूछे गए थे, जो पेपर लीक के पुख्ता सबूत पेश करते हैं।


