अमेरिकी राष्ट्रपति के सैन्य कार्रवाई रोकने के बयान ने वैश्विक स्तर पर छेड़ी नई चर्चा
नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ बातचीत के दावे और पांच दिन तक सैन्य कार्रवाई रोकने के बयान ने वैश्विक स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। इस पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और पूर्व राजनयिक की अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई हैं। पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप वास्तव में ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं या फिर यह बयान दबाव से बचने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि युद्ध के समय इस तरह की अस्पष्ट स्थिति सामान्य होती है। हालांकि, उन्होंने इसे एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि इससे उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन असली स्थिति का पता 5 दिन बाद ही चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीच देशों को अपने ऊर्जा ढांचे पर काम जारी रखना चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान से बातचीत हुई है और 5 दिन जंग रोकने का आदेश दिया है। शशांक ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि ट्रंप बचने के लिए ऐसा कह रहे है या वाकई ईरान से बातचीत चल रही है। युद्ध के वक्त इस तरह की अस्पष्ट स्थिति दिखती ही है। हालांकि हमें एनर्जी इन्फ्रा पर काम करते रहना चाहिए। कुछ वक्त का ब्रेक है। अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद ईरान से जिस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली है, संभव है इसके बाद अमेरिका अपनी स्थिति का आकलन करना चाहता है, लेकिन जो भी है, यह सकारात्मक खबर है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ हर्ष पंत का मानना है कि मौजूदा हालात में अमेरिका अपनी रणनीति की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि बातचीत नहीं हो रही है, क्योंकि दोनों देशों के बीच बैकडोर टॉक पहले से चल रही है। पंत ने कहा कि भले ही ट्रंप ने हमले रोकने की बात कही हो लेकिन इजराइल की ओर से ईरान पर हमले जारी हैं। ऐसे में स्थिति जटिल बनी हुई है। आर्थिक गतिविधियों में रुकावट को देखकर अमेरिका अपनी रणनीति की समीक्षा कर रहा है। यह कहना भी ठीक नहीं कि बातचीत नहीं हो रही।
उन्होंने आगे कहा कि अब स्थिति काफी हद तक ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। यदि ईरान होर्मुज को लेकर नरमी दिखाता है, तो यह 5 दिन का ब्रेक आगे की शांति प्रक्रिया का आधार बन सकता है। पंत ने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक आर्थिक दबाव और अमेरिका में बढ़ती महंगाई भी इस फैसले के पीछे अहम कारण हो सकते हैं।


