एस.के. झा. ‘सुमन’
दुमका। शहर का भवन निर्माण विभाग गुरुवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। अल्पकालीन निविदा आमंत्रण सूचना संख्या 41/2025-26 के लिए बुलाई गई प्रक्रिया के दौरान माहौल किसी अखाड़े जैसा नजर आया। दो गुटों के बीच शुरू हुई सामान्य बहस देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई, जिसके बाद दफ्तर में अफरा-तफरी मच गई और जमकर लात-घूंसे चले।
इस पूरे हंगामे की मुख्य वजह विभाग की ‘ऑफलाइन टेंडर’ वाली प्रक्रिया को माना जा रहा है। जब पूरे राज्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन ई-टेंडरिंग अपनाई जा रही है, तब दुमका में ऑफलाइन प्रक्रिया जारी रखने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय संवेदकों का सीधा आरोप है कि अधिकारियों और चहेते ठेकेदारों के बीच कमीशनखोरी के खेल को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर पुराना तरीका अपनाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, आर्चरी विभाग के इस टेंडर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निकाला गया था ताकि सेटिंग और मैनेजमेंट का खेल आसानी से खेला जा सके। इसी मैनेजमेंट के विरोध में संवेदकों का गुस्सा फूट पड़ा। वीडियो फुटेज में घटना के दौरान कार्यपालक अभियंता विजय अग्रवाल ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों की ऑफलाइन टेंडर की जिद ने भ्रष्टाचार के आरोपों को एक बार फिर हवा दे दी है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है।एग्जीक्यूटिव पदाधिकारी विजय अग्रवाल का पक्ष जानने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।फिलहाल दफ्तर में सन्नाटा तो है, पर अंदरूनी तनाव बरकरार है।


