एयरलाइन से आने वाले आधिकारिक संदेश- ईमेल, एसएमएस या ऐप नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें
नई दिल्ली । पश्चिम एशिया की यात्रा पर निकले कई यात्री हाल ही में बढ़ते युद्ध और हवाई मार्ग बंद होने की वजह से अपनी उड़ान और होटल बुकिंग रद्द कर रहे हैं। यात्रियों को पहले तय करना चाहिए कि वे यात्रा करना चाहते हैं या रिफंड लेना चाहते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे एयरलाइन से आने वाले आधिकारिक संदेश- ईमेल, एसएमएस या ऐप नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें और कोई भी कदम उठाने से पहले नियमों को समझ लें। यदि युद्ध या हवाई मार्ग बंद होने की वजह से एयरलाइन अपनी उड़ान रद्द करती है, तो नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियम स्पष्ट हैं। बुकिंग करा चुके यात्री को पूरी रकम वापस मिलती है या उसकी वैकल्पिक यात्रा का इंतजाम किया जाता है। ऐसी स्थिति को फोर्स मैजर कहा जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार इस तरह की असामान्य परिस्थितियों में एयरलाइन से अलग मुआवजा मांगना जरूरी नहीं होता, लेकिन मूल टिकट की रकम लौटानी होती है। रिफंड का अधिकार मजबूत करने के लिए एयरलाइन से लिखित में पुष्टि लेना जरूरी है। विशेषज्ञों की मानें तो खुद टिकट कैंसल कराने के बजाय इंतजार करें कि एयरलाइन ही उड़ान रद्द कर दे। अगर यात्री खुद टिकट रद्द करा लेता है मगर उड़ान चालू रहती है तो तब तक किराये के सामान्य नियम लागू होंगे, जब तक एयरलाइन किराया माफ करने के या मुफ्त में कैंसल करने की नीति नहीं लाती है। जब एयरलाइन उड़ान को टालने या शुल्क माफ करने जा रही हो तो नॉन-रिफंडेबल किराये वाले टिकट कैंसल बिल्कुल नहीं करें। लॉ विशेषज्ञों की सलाह है, यात्रियों को खुद टिकट कैंसल नहीं करने चाहिए बल्कि एयरलाइन से लिखित कैंसलेशन मांगना चाहिए ताकि रिफंड का उनका अधिकार बना रहे। अगर एयरलाइन आपको वैकल्पिक उड़ान का प्रस्ताव देती है तो उसे स्वीकार करना और यात्रा करना जरूरी नहीं है। अगर आपको लगता है कि तेज होते युद्ध के बीच आपको सफर नहीं करना है तो आप एयरलाइन से उसकी जगह पूरा किराया वापस मांग सकते हैं।


