रांची: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रांची के बांधगाड़ी की रहने वाली आदिवासी महिला उद्यमी माला कुजूर अपने काम से कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। वह ‘’कुड़ुख्सकेयर’ की संचालिका हैं और महिलाओं के स्वास्थ्य व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं। इसके साथ ही वह नेम्हा वैली फाउंडेशन के माध्यम से महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने का भी काम कर रही हैं।
माला कुजूर ने महिलाओं की जरूरतों को देखते हुए सबसे पहले सैनिटरी नैपकिन बनाने का कार्य शुरू किया। इसके अलावा औषधीय पौधों से तैयार किए जाने वाले प्राकृतिक साबुन का निर्माण भी किया जा रहा है। ये उत्पाद पूरी तरह प्रकृति के अनुकूल हैं। आने वाले समय में पेपर प्लेट और डोना मेकिंग के क्षेत्र में भी काम शुरू करने की तैयारी है।
माला कुजूर बताती हैं कि घरेलू हिंसा और आर्थिक समस्याओं से जूझती महिलाओं की स्थिति ने उन्हें उद्यमिता की ओर प्रेरित किया। उनका मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे समाज में अपनी अलग पहचान बना पाती हैं।
हालांकि इस सफर की शुरुआत आसान नहीं थी। एक आदिवासी महिला होने के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वित्तीय समस्याएं, प्रशिक्षण की कमी, विपणन और नेटवर्क की दिक्कतें, सामाजिक दबाव और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी बाधाएं सामने आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
आज उनके इस प्रयास से करीब 100 से 200 महिलाएं अलग-अलग तरीकों से लाभान्वित हो रही हैं। कई महिलाओं को रोजगार मिला है, जबकि कई महिलाएं उनके काम से प्रेरित होकर खुद भी छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आगे आ रही हैं।
माला कुजूर कहती हैं कि आदिवासी समाज हमेशा प्रकृति से जुड़ा रहा है, इसलिए उनके उत्पादों में प्राकृतिक चीजों का अधिक इस्तेमाल किया जाता है। इससे उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता भी बनी रहती है।
महिला दिवस के मौके पर उन्होंने महिलाओं से अपने जुनून को पहचानने, छोटे स्तर से शुरुआत करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आगे बढ़ने की अपील की। साथ ही उन्होंने सरकार से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं को मजबूत करने और समाज से महिलाओं को बराबरी का सम्मान देने की उम्मीद जताई।
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