30 दिनों में टेंडर निष्पादित नहीं हुए तो होंगे रद्द : दीपिका पांडेय सिंह
ग्रामीण सड़कों और फूलों का वर्ष 2024 25 का निविदा रद्द नहीं हुआ: हेमलाल मुर्मू
रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सदन की कार्यवाही अल्पसूचित प्रश्नों के साथ शुरू हुई। प्रश्नकाल में विधायकों ने नगर निकायों में सेवा नियमावली, परिवहन विभाग में रिक्त पदों और पीडब्ल्यूडी की निविदाओं में हो रही देरी जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। सदन में सबसे ज्यादा बहस लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) की निविदाओं में हो रही देरी को लेकर हुई। लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू और मथुरा महतो ने आरोप लगाया कि नियम के अनुसार 180 दिनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, लेकिन कई मामलों में एक-एक साल तक फाइलें लंबित रहती हैं। विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री के निर्देश के बावजूद कुछ निविदाएं रद्द नहीं की गईं। इस पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने स्वीकार किया कि प्रक्रिया में देरी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 2024-25 की सभी लंबित निविदाओं को निष्पादित करने का निर्देश दे दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि 30 दिनों के भीतर निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई या रद्द नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका कर्मियों की सेवा नियमावली पर सवाल
विधायक अरूप चटर्जी ने नगर पालिकाओं में कार्यरत 63 अधिकारियों की सेवा नियमावली को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने इन कर्मियों के भविष्य और सेवा शर्तों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इस पर संबंधित मंत्री ने कहा कि ये 63 कर्मी ‘राज्य कर्मी’ की श्रेणी में नहीं आते, बल्कि नगरपालिका कर्मी हैं। इसलिए उन पर नगरपालिका की सेवा नियमावली ही लागू होती है।
परिवहन विभाग में मोटरयान निरीक्षकों की कमी का मुद्दा उठा
सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने परिवहन विभाग में मोटरयान निरीक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या वर्ष 2023 की नियुक्तियों के बाद भी पद रिक्त हैं। विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि 2023 में 46 पदों के लिए अधिसूचना जारी की गई थी और सभी पदों पर नियुक्ति पूरी हो चुकी है। फिलहाल कोई पद खाली नहीं है। साथ ही भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए 21 नए पदों के सृजन के लिए दिसंबर में अधिसूचना भेजी जा चुकी है।
पुल निर्माण की राशि पर अध्यक्ष का सुझाव
सिल्ली विधायक अमित कुमार ने सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की सीमा पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि इस सीमा के कारण बड़े पुलों का निर्माण प्रभावित हो रहा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए सुझाव दिया कि यदि ग्रामीण विकास विभाग के पास 10 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का प्रावधान नहीं है, तो ऐसी योजनाओं को पीडब्लूडी को स्थानांतरित कर दिया जाए, ताकि निर्माण कार्य में तकनीकी और वित्तीय बाधाएं दूर हो सकें।
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केंद्र पर भेदभाव का आरोप, 10 हजार करोड़ के ऑडिट की जांच होगी: वित्त मंत्री
रांची: विधानसभा के बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने साफ कहा कि विकास ही सत्ता और विपक्ष दोनों का साझा लक्ष्य होना चाहिए, लेकिन केंद्र की ओर से झारखंड के साथ भेदभाव किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि यदि केंद्र सरकार को कोई संदेह है तो वह अपनी टीम भेजकर जांच करा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से राज्य का हिस्सा रोका जा रहा है।
बजट में सामाजिक क्षेत्र पर सबसे ज्यादा जोर
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए 67,459 करोड़ रुपये, आर्थिक क्षेत्र के लिए 59,044 करोड़ रुपये और सामान्य क्षेत्र के लिए 3,255 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस गरीबों की मदद, बच्चों की पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर है। दावा किया कि इस वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन धान और 10 लाख मीट्रिक टन दलहन का उत्पादन हुआ है। राज्य मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डीएमएफ फंड पर सख्ती, कमेटी का गठन
वित्त मंत्री ने 10 हजार करोड़ रुपये के ऑडिट मामलों की जांच कराने की घोषणा की। साथ ही डीएमएफ फंड में गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। घोषणाओं के पालन की निगरानी के लिए राज्य विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की भी घोषणा की गई। मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर हो रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाना जरूरी है, जिससे राज्य में उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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विधायक जयराम महतो ने बजट पर सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए
रांची: बजट सत्र में विधायक जयराम महतो ने 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये के बजट पर सरकार को घेरते हुए कई अहम सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट का आकार भले ही बड़ा हो और उसकी प्रस्तुति आकर्षक हो, लेकिन असली परीक्षा योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन से होती है।
जयराम महतो ने कहा कि स्टेट जीडीपी के आधार पर झारखंड 19वें स्थान पर है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य 32वें स्थान पर है। उनके मुताबिक, प्रति व्यक्ति आय ही आम लोगों की वास्तविक तरक्की का सही पैमाना है। उन्होंने कहा कि बजट में राज्य की आर्थिक दिशा और स्पष्ट विजन दिखाई देना चाहिए।
विधायक ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से भरपूर है, लेकिन यहां का कच्चा माल बाहर भेज दिया जाता है। इससे रोजगार और मुनाफा दूसरे राज्यों को मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर राज्य में ही वैल्यू एडिशन और उद्योग क्यों नहीं विकसित किए जा रहे। जयराम महतो ने झारखंड को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की मांग की। उन्होंने डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्री, कोल गैसीफिकेशन मिशन और फूड प्रोसेसिंग पार्क की स्थापना पर जोर देते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।


