नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से रिपोर्ट मांगी है कि उस संविधान बेंच के फैसले के बाद क्या कार्रवाई हुई है, जिसमें एससी और एसटी के आरक्षण को कोटा के भीतर कोटा बनाने की मंजूरी दी गई थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर लागू करने पर भी जोर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने उन याचिकाओं पर सुनवाई कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति के आरक्षण से क्रीमीलेयर को बाहर करने के लिए मानदंड निर्धारित करने की मांग हुई है।
बता दें कि ओपी शुक्ला और समता आंदोलन समिति के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके एससी-एसटी आरक्षण से क्रीमीलेयर करने की मांग गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में सात जजों के द्वारा दिए गए फैसले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त 2024 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला दिया था। डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने एससी-एसटी आरक्षण को श्रेणी में बांटने का अधिकार राज्य सरकार दिया था।
एससी और एसटी के लोगों के बीच समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों को एससी-एसटी के आरक्षण को वर्गीकरण करने यानि कोटा के भीतर कोटा बनाने की मंजूरी दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सब कैटेगिरी का आधार उचित होना चाहिए। इसके साथ ही संवैधानिक पीठ ने एससी-एसटी आरक्षण में भीक्रीमीलेयर को लागू करने की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लागू करने की मांग को लेकर शुक्ला और समता आंदोलन समिति ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट टिप्पणी को आधार बनाकर केंद्र और राज्यों को दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है, केंद्र और राज्य उन मानदंडों को तय करें जिनके आधार पर एससी-एसटी वर्ग के संपन्न लोगों को आरक्षण से बाहर रख सके, ताकि वास्तव में वंचित समूहों को इसका लाभ मिले। याचिकाओं में निश्चित समय सीमा तय करने की भी मांग की गई है ताकि अधिक पिछड़े उप-समूहों को जल्द से जल्द प्राथमिकता मिल सके।
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