●शहर के मुस्लिम, आदिवासी और ईसाई वोटरों के बीच झामुमो की है अच्छी पकड़
●अध्यक्ष पद के 18 प्रत्याशियों में अल्पसंख्यक व आदिवासी समुदाय से नहीं है कोई प्रत्याशी
●अब झामुमो के वोट बैंक माने जाने वाले अल्पसंख्यक वोटरों को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रहे अध्यक्ष पद के प्रमुख प्रत्याशी
सुमन सिंह
दुमका।एक ओर नगर निकाय चुनाव में भाजपा अपना पूरा दम लगा रही है,वहीं दूसरी ओर झामुमो ने दुमका नगर परिषद चुनाव में वार्ड पार्षद या अध्यक्ष, किसी भी पद के किसी प्रत्याशी को समर्थन देने से इंकार कर दिया है।झामुमो ने धनबाद और देवघर सहित कई शहरों में नगर निकाय चुनाव में मेयर पद के लिए प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया है पर दुमका में तटस्थ रहने का फैसला किया है।झामुमो के इस फैसले के कई मायने मतलब निकाले जा रहे हैं।राज्य में झामुमो की सरकार है और झामुमो कई दूसरे शहरी निकायों का चुनाव पूरी मुस्तैदी से लड़ रहा है।दुमका में सांसद और विधायक दोनों झामुमो के हैं।दुमका शहर में लगभग हर वार्ड में झामुमो के समर्पित कार्यकर्ता हैं।कई झामुमो कैडर वार्ड पार्षद और अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं।पर उनमें किसी को भी झामुमो का समर्थन नहीं दिये जाने के पार्टी के निर्णय से पार्टी के समर्थन की उम्मीद पाल रखे प्रत्याशियों को झटका लगा है।यह सर्व विदित है कि दुमका में शहरी वोटरों के बीच भाजपा की तुलना में झामुमो की पैठ कम है पर दुमका शहर के मुस्लिम,ईसाई और आदिवासी वोटर झामुमो के वोट बैंक माने जाते हैं।नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहा है पर जिस प्रत्याशी को झामुमो समर्थन देता उसे आदिवासी और अल्पसंख्यक वोट थोक में मिल सकता था।2018 के चुनाव में भी झामुमो ने अध्यक्ष पद के लिए किसी प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया था।झामुमो का प्रत्याशी नहीं होने का लाभ निर्दलीय प्रत्याशी श्वेता झा को मिला था।निर्दलीय श्वेता झा ने भाजपा प्रत्याशी अमिता रक्षित को पराजित कर दिया था।
जबकि उपाध्यक्ष पद के लिए झामुमो ने अभिषेक चौरसिया को मैदान में उतारा था।अभिषेक चौरसिया चुनाव हार गए थे और उन्हें उस चुनाव में 7000 से अधिक वोट मिला था।इस बार अभिषेक चौरसिया अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं।वे झामुमो से समर्थन के स्वाभाविक दावेदार थे पर झामुमो ने किसी प्रत्याशी को समर्थन देने से मना कर दिया है।कुछ प्रमुख प्रत्याशी और उनके रणनीतिकार यह आकलन करने में जुटे हैं कि किसी प्रत्याशी को समर्थन नहीं देने के झामुमो के इस फैसले का किस प्रत्याशी को नफा और किस प्रत्याशी को नुकसान होगा।दुमका नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में कुल 18 प्रत्याशी हैं पर मुख्य मुकाबला तीन-चार प्रत्याशियों के बीच ही दिख रहा है।किसी को समर्थन नहीं देने और वोटरों से अपने स्वविवेक से वोट करने की झामुमो की अपील से झामुमो का वोट बैंक माने जाने वाले अल्पसंख्यक और आदिवासी वोट को अपने पक्ष में करने की रणनीति बनाने में सभी प्रमुख प्रत्याशी जुट गए हैं।बता दें कि दुमका में आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय से अध्यक्ष पद का कोई प्रत्याशी नहीं है।
—


