रांची: झारखंड में फरवरी माह में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव इस बार कई बदलावों के साथ होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान पूरी तरह बैलेट पेपर से कराया जाएगा और मतदाताओं को इस चुनाव में ‘नोटा’ का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा। मतदाता महापौर/अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पद पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से किसी एक के पक्ष में ही मतदान कर सकेंगे। इसी के साथ आयोग ने चुनाव में पारदर्शिता और व्यय नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम खर्च सीमा निर्धारित कर दी है। आयोग का कहना है कि पूर्व के चुनावों में खर्च के मदों का सही-सही लेखा प्रस्तुत नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं, जिसे देखते हुए इस बार सख्ती बरती जा रही है।
रांची-धनबाद के लिए सबसे अधिक 25 लाख रुपये तक सीमा
रांची और धनबाद नगर निगम में महापौर पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे। वार्ड पार्षद प्रत्याशी 5 लाख रुपये तक खर्च कर सकते हैं। वहीं, अन्य निकायों का व्यय प्रावधान में नगर निगम (10 लाख से कम आबादी) महापौर/अध्यक्ष 15 लाख, पार्षद 3 लाख,
नगर परिषद (1 लाख से अधिक आबादी) अध्यक्ष 10 लाख, पार्षद 2 लाख, नगर परिषद (1 लाख से कम आबादी) अध्यक्ष 6 लाख, पार्षद 1.5 लाख और नगर पंचायत (12,000 से 40,000 आबादी) अध्यक्ष 5 लाख, पार्षद 1 लाख तक खर्च करेंगे।
चुनावी सामग्रियों और सेवाओं की दरें तय करने का निर्देश
चुनावी खर्च में गड़बड़ी पर रोक लगाने के लिए आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को चुनावी सामग्रियों और सेवाओं की दरें तय कर प्रकाशन करने के निर्देश दिए हैं। इसमें लाउडस्पीकर, माइक्रोफोन, पंडाल निर्माण, प्रचार सामग्री, होर्डिंग, फ्लैग, वाहन किराया, होटल और गेस्ट हाउस की दरें शामिल होंगी।।निर्वाचन आयोग ने कहा है कि व्यय प्रेक्षक उम्मीदवारों के खर्च का परीक्षण तय दरों के आधार पर करेंगे, ताकि कोई भी उम्मीदवार वास्तविक से कम या अधिक मूल्यांकन दिखाकर नियमों का उल्लंघन न कर सके।


