नई दिल्ली । भारत के वाहन उद्योग में महंगी और लक्जरी कारें वर्तमान में गंभीर आर्थिक दबाव में हैं। इसका कारण भारतीय रुपये का डॉलर और यूरो के मुकाबले लगातार कमजोर होना है। ज्यादातर लक्जरी कारें यूरोप से आयात की जाती हैं, जिसमें पूरी तरह से तैयार कारें (सीयूबी) और पूरी तरह से नॉक-डाउन (सीकेडी) किट शामिल हैं, जिन्हें भारत में तैयार किया जाता है। यूरो के मुकाबले रुपये में इस साल अब तक 15 प्रतिशत तक की गिरावट ने लग्जरी मूल उपकरण विनिर्माताओं की लागत संरचना को प्रभावित किया है, जिससे उनकी लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा है।
कीमतों में हालिया गिरावट के कारण मांग में आई तेजी अब ज्यादा समय टिक पाना मुश्किल है। एक रिपोर्ट में मर्सिडीज-बेंज इंडिया के एमडी और सीईओ संतोष अय्यर ने कहा कि रुपये के कमजोर होने और अन्य आर्थिक कारणों के चलते अगले कुछ महीनों में लक्जरी वाहनों की कीमतें मौजूदा स्तर से बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि कंपनी जनवरी 2026 से अपने मॉडल रेंज में कीमतों के पुन: समायोजन पर विचार कर रही है, ताकि बढ़ती लागत के दबाव को संतुलित कर सके। इसी तरह एक अन्य जर्मन वाहन निर्माता ने भी पुष्टि की है कि वे भी जनवरी से कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं और वृद्धि की सीमा तय करने की प्रक्रिया जारी है।
मर्सिडीज पहले ही इस वर्ष तीन बार कीमतें बढ़ चुकी है। विदेशी मुद्रा विनिमय दर में लगातार उतार-चढ़ाव और इनपुट लागत में वृद्धि के चलते कंपनियों के लिए कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि निर्माताओं ने पहले जीएसटी दर में कटौती के लाभों को ग्राहकों तक पहुंचाया था, जिसके कारण उनके पास लागत को संतुलित करने की सीमित क्षमता बची है। कुछ समय के लिए कीमतों में बढ़ोतरी को टाला गया था, लेकिन अब अधिकांश ब्रांड 2026 की शुरुआत में बढ़ोतरी का फैसला लेने की तैयारी कर रहे हैं।
सिर्फ लक्जरी ओईएम ही नहीं, बल्कि मास मार्केट कार निर्माता भी रुपये की कमजोरी से प्रभावित हो रहे हैं। कारों में उपयोग होने वाले लगभग 95 प्रतिशत सेमीकंडक्टर चिप्स खासतौर पर उन्नत सुविधाओं वाली महंगी कारों में आवश्यक ताइवान, चीन और दक्षिण कोरिया से आयात किए जाते हैं। डॉलर की मजबूती के कारण इनकी लागत तेजी से बढ़ी है, जिससे ऑटो उद्योग के मुनाफे पर असर पड़ रहा है। उद्योग के एक विशेषज्ञ ने बताया कि अधिकांश वाहन निर्माता जनवरी में कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकते हैं और इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई जा रही है।
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