मुंबई । रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने सिल्वर लोन के लिए अब बैंकों और एनएफसी कंपनियों को मंजूरी दे दी है। रिजर्व बैंक ने इसके लिए नियम तैयार किए हैं। अभी तक सिल्वर लोन के लिए कोई नियम नहीं थे।
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के नियमों में स्पष्ट किया गया है। चांदी पर लोन गहनों और सिक्कों के गिरवी रखने पर ही दिया जाएगा। शुद्ध चांदी और सिल्वर म्युचुअल फंड जैसी निवेश योजना के निवेश पर कोई लोन नहीं दिया जाएगा।
लोन लेने वाला एक ग्राहक अधिकतम 10 किलो चांदी के आभूषण और 500 ग्राम तक चांदी के सिक्के गिरवी रखकर लोन ले सकता है। इससे अधिक गिरवी रखने की अनुमति बेंकों ओर एनएफसी कंपनी को नहीं दी गई है।
मूल्यांकन
लोन की रकम तय करने के लिए लोन टू वैल्यू अनुपात लागू रहेगा। चांदी के मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार ही ऋण दिया जाएगा। बैंक तथा एनएफसी कंपनियों को पिछले 30 दिनों के औसत बंद मूल्य पर जो भी कम हो उसे आधार बनाकर न्यूनतम 70 और अधिकतम 85 फ़ीसदी ही लोन दिया जा सकेगा।
रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है। सभी दस्तावेज और जानकारी स्थानीय भाषा तथा ग्राहक की भाषा के अनुसार ही दी जाना आवश्यक है। गहनों की जांच कर्ज लेने वाले व्यक्ति की उपस्थिति में कराना अनिवार्य है। बैंक मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त करेगा, इसे लोन एग्रीमेंट के साथ संलग्न करेगा।
ऋण और ब्याज चुकता नहीं होने की दशा में बैंक गहनों या चांदी की नीलामी कर सकता है। इसके लिए ग्राहक को नोटिस देना होगा।
अगर ग्राहक संपर्क में नहीं है, तो पब्लिक नोटिस जारी करना अनिवार्य होगा। इसके लिए एक माह का समय होगा।
अगर ग्राहक ऋण चुकाकर 2 साल बाद भी अपना सोना और चांदी वापिस नहीं लेता है। तो बैंक उसे अनक्लेमड घोषित कर सकता है।
बैंक या एनएफसी कंपनी यदि चांदी लौटने से इंकार करती है। ऐसी स्थिति में उसे ₹5000 प्रतिदिन का मुआवजा ग्राहक को देना होगा।


