कोलकाता । मां भारती की आजादी का माह अगस्त चल रहा है। फिजा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव जैसे अमर क्रांतिकारियों के तराने गूंज रहे हैं। इन सबके बीच पूर्व मिदनापुर के चंदनपुर गांव का चौधरी घराना आज भी सिर उठा कर खड़ा है, जैसे किसी अपने के बलिदान को सहेजकर रखा हो। यह वही घर है, जिसके बड़े गुंबदों के नीचे, लकड़ी के दरवाजाें और खिड़कियों के पीछे, कभी आजादी की योजना बनती थी और जिसे अंग्रेजों ने साल 1942 में आग के हवाले कर दिया, मगर वे उस आग से सिर्फ ईंट-पत्थर जला पाए, आजादी का सपना नहीं।
स्वदेशी आंदोलन के उस दौर में चंदनपुर का यह मकान क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना था। अंग्रेजों को इस घर से इतना डर था कि आसपास किसी अंग्रेज अधिकारी या कर्मचारी की अकेले फटकने की हिम्मत नहीं होती थी। यहां लाठी चलाने की आवाजें गूंजती थीं, मंदिर के अंदर फुसफुसाहट में मीटिंग होती थी, और देश की आजादी के लिए रणनीति तैयार होती थी।
बलाई लालदास महापात्र जैसे निर्भीक नेता इस आंगन में नए संघर्ष की चिंगारी सुलगाते थे। पुलिन राय चौधरी, यामिनी पहाड़ी, विजय मंडल जैसे योद्धा यहां जुटते थे, तो प्रमथ बंदोपाध्याय, ईश्वर माल और सुधीर दास जैसे नेता कांथी से चलकर आते थे। यह घर एक मकान नहीं, स्वतंत्रता का मंदिर था। अगस्त 1942 में जब पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति चल रही थी, तब यह मकान क्रांतिकारियों का मुख्य अड्डा था। यहां से अंग्रेजों पर हमले और उनकी कमर तोड़ने की कई योजनाएं बनी और कारगर हुईं। मेदिनीपुर मुख्यालय से अंग्रेजी झंडे को उतार कर तिरंगा लहराने का जो विशाल आंदोलन हुआ था, उसका केंद्र बिंदु भी यही घर था।
जब अंग्रेजों को खबर मिली कि यह हवेली क्रांतिकारियों का अड्डा है, तो उन्होंने इसे घेर लिया और जला डाला। लकड़ी की छतें, गुंबद और दरवाजे राख हो गए, मगर वहां उठी देशभक्ति की ज्वाला और भी भड़क उठी। चौधरी परिवार के वंशज आज भी उस घर की दीवारों पर लगी कालिख में अपने पूर्वजों की कुर्बानी का इतिहास पढ़ते हैं।
यह घर आज भी गवाही देता है—अंग्रेज हथियारों से डर दिखा सकते थे, आग से घर जला सकते थे, मगर इस मिट्टी से उपजी आज़ादी की लौ को बुझा नहीं पाए।
15 अगस्त, 1947 को आजादी के बाद इस घर को और इसके हिस्से को संरक्षित रखा गया है। हर साल स्वतंत्रता दिवस से पहले यहां देश प्रेमियों का एक जमघट लगता है।
चंदनपुर का यह चौधरी घराना सिर्फ एक इमारत नहीं, स्वतंत्रता संग्राम का ऐसा अध्याय है, जो हर हिंदुस्तानी के दिल में देशप्रेम की चिंगारी भड़काता है।
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