नई दिल्ली । सूरज… धरती की ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत, लेकिन इतना दूर और खतरनाक कि उसके पास जाने की सोच मात्र से ही विज्ञान कांप उठता है। लेकिन अब नासा का पार्कर सेलर प्रोब सूरज की परिक्रमा करते हुए उसकी ऐसी तस्वीरें लेकर लौटा है, जिन्हें देखना किसी ‘धधकते नरक’ को आंखों से देखने जैसा है। 24 दिसंबर 2024 को पार्कर सोलर प्रोब ने अब तक की सबसे नजदीकी उड़ान भरी, सिर्फ 3.8 मिलियन मील की दूरी से। इस दौरान इसके ऑनबोर्ड कैमरा सिस्टम ने सूरज के कोरोना से उठते एक भीषण कोरोनल मास इजेक्शन यानी सीएमई की लाइव रिकॉर्डिंग की। ये कोई आम वीडियो नहीं, बल्कि सूरज के क्रोध का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यह बात किसी चमत्कार से कम नहीं कि 1,300 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान और सूरज की रेडिएशन की आंधी के बीच पार्कर प्रोब पूरी तरह सुरक्षित रहा। नासा की इंजीनियरिंग टीम इसे मानव विज्ञान का बेजोड़ कारनामा मान रही है। पार्कर प्रोब का अगला फ्लाइबाय 15 सितंबर 2025 को होना है, जो इसे और भी नजदीक ले जाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगली बार वो सूरज की सतह से उठने वाली सोलर हवाओं की उत्पत्ति और उनकी दिशा का रहस्य भी खोल पाएंगे।
स्पेस वेदर न केवल सैटेलाइट्स और स्पेस मिशनों को प्रभावित करती है, बल्कि धरती पर जीपीएस रेडियो सिग्नल और पावर ग्रिड्स तक को खतरे में डालती है। इस नई जानकारी से न केवल भविष्य की चेतावनी प्रणाली बेहतर होगी, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों और तकनीक की सुरक्षा की नई राहें खुलेंगी।
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