नीमच । मध्यप्रदेश के नीमच जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर रेवती नदी के किनारे बसे गांव आंतरी बुजुर्ग में एक सबसे प्राचीन मंदिर है, जहां भक्तों ने चढ़ाई अपनी जीभ। इस बार तीन भक्तों ने नवरात्र में अपनी मन्नत पूरी होने पर माँ आंतरीमाता के दरबार में किया यह अनोखा अद्भुत कार्य। इस मंदिर की स्थापना 700 साल से भी अधिक पुरानी है और जब भी कोई भक्त अपने मन की बातें इस पवित्र स्थान पर माँ से कहता है, तो उसको मिलती है उसकी इच्छा। इस चैत्र नवरात्रि में तीन भक्तों ने अपनी मन्नत पूरी होने पर माता को अपनी जीभ चढ़ाई।
इनमें नीमच के धनगर समाज के युवा दीपक, नीमच की ही एक महिला और रतलाम जिले के सेमलिया कालूखेड़ा गांव की एक महिला शामिल हैं। नीमच के एक भक्त ने बताया कि मेरे भतीजे ने नवरात्र के पहले दिन माता को अपनी जीभ चढ़ाई है। माता की कृपा से नौ दिन में उसकी जीभ वापस आ जाएगी। यहां की यह महिमा है कि मन्नत पूरी होने पर लोग अपनी जीभ चढ़ाते हैं और वह वापस आ जाती है।
इस बार उनके भतीजे के साथ दो महिलाओं ने भी ऐसा किया है। रतलाम जिले के सेमलिया कालूखेड़ा गांव से आए एक भक्त ने अपनी मां के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि हमने यहां माता से मन्नत मांगी थी, जो पूरी हो गई। मेरी मां ने भी अपनी जीभ चढ़ाई है। माता की बहुत कृपा है, जो भी यहां मांगता है, उसकी मुराद पूरी होती है। उन्होंने बताया कि उनकी मां भी नौ दिन तक मंदिर में रहेंगी और माता की कृपा से उनकी जीभ वापस आ जाएगी। मान्यता है कि माता के वाहन के दो पदचिह्न यहां मौजूद हैं। एक पदचिह्न मंदिर के अंदर है, जबकि दूसरा दक्षिण दिशा में हनुमान घाट की शिला पर अंकित है। यहां आने वाले भक्तों का कहना है कि माता हर किसी की मनोकामना पूरी करती हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में भक्त माता के दरबार में रहते हैं और अपनी भक्ति का प्रमाण देते हैं। मां आंतरीमाता के इस मंदिर की ख्याति मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से भक्त आते हैं।


